लोकसभा में NEET मुद्दे पर चर्चा को सरकार तैयार! किरेन रिजिजू का ऐलान; अखिलेश बोले- 'युवाओं की आवाज दबाई नहीं जा सकती'

    22-Jul-2026
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- विपक्ष ने धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग दोहराई
- दोनों सदनों में हंगामे के बीच कई बार स्थगित हुई कार्यवाही

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नई दिल्ली। संसद के मानसून सत्र में बुधवार को कथित NEET पेपर लीक और परीक्षा अनियमितताओं का मुद्दा एक बार फिर जोरदार तरीके से उठा। लोकसभा में कार्यवाही शुरू होते ही विपक्ष ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर हंगामा किया। इस बीच संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने कहा कि सरकार इस मुद्दे पर चर्चा के लिए पूरी तरह तैयार है। उन्होंने लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला से सभी दलों के नेताओं की बैठक बुलाने का आग्रह किया, ताकि चर्चा किस नियम के तहत होगी, उसकी तिथि और अवधि तय की जा सके। हालांकि, सरकार की इस सहमति के बावजूद विपक्ष का हंगामा जारी रहा। कांग्रेस सांसद के.सी. वेणुगोपाल ने कहा कि विपक्ष केवल चर्चा ही नहीं, बल्कि शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की भी मांग कर रहा है। लगातार नारेबाजी के कारण लोकसभा की कार्यवाही दोपहर 2 बजे तक स्थगित करनी पड़ी।

अखिलेश यादव ने उठाए तीखे सवाल
हंगामे के दौरान समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने सीधे लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला से सवाल करते हुए कहा कि यह किसी एक राजनीतिक दल का नहीं, बल्कि देश के युवाओं और छात्रों के भविष्य का सवाल है। उन्होंने कहा कि सदन को युवाओं की आवाज सुननी चाहिए और उनके मुद्दों पर गंभीर चर्चा होनी चाहिए। अपने संबोधन में अखिलेश ने पुलिस कार्रवाई और छात्रों के साथ हुए व्यवहार पर भी चिंता जताई। उन्होंने कहा कि संसद में युवाओं से जुड़े मुद्दों पर खुलकर चर्चा होनी चाहिए, क्योंकि यह देश के भविष्य से जुड़ा विषय है। विपक्ष का आरोप है कि परीक्षा प्रणाली में कथित अनियमितताओं और हालिया घटनाक्रमों को लेकर सरकार जवाबदेही से बच रही है, जबकि सरकार का कहना है कि वह संसदीय प्रक्रिया के तहत हर विषय पर चर्चा के लिए तैयार है।

सरकार ने दोहराया चर्चा का प्रस्ताव
विपक्षी दल लगातार यह मांग कर रहे हैं कि कथित NEET पेपर लीक और परीक्षा प्रक्रिया में सामने आए विवादों को लेकर केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए इस्तीफा दें। विपक्ष का कहना है कि यह केवल परीक्षा प्रणाली का मामला नहीं, बल्कि लाखों छात्रों के भविष्य और सरकार की जवाबदेही से जुड़ा प्रश्न है। वहीं सरकार ने दोहराया कि वह इस मुद्दे पर संसद में विस्तृत चर्चा से पीछे नहीं हट रही है, लेकिन सभी प्रक्रियाएं संसदीय नियमों के अनुसार ही पूरी की जाएंगी। इसी मुद्दे को लेकर संसद के मौजूदा सत्र में लगातार गतिरोध बना हुआ है और कार्यवाही कई बार बाधित हो चुकी है।

राज्यसभा में काली पट्टी बांधकर पहुंचे खड़गे
लोकसभा की तरह राज्यसभा में भी बुधवार को इसी मुद्दे पर तीखी नोकझोंक देखने को मिली। विपक्ष के नेता और कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने छात्र प्रदर्शन के दौरान कथित लाठीचार्ज और आंसू गैस के इस्तेमाल का मुद्दा उठाने की कोशिश की, लेकिन सत्ता पक्ष के विरोध के कारण सदन में जोरदार हंगामा शुरू हो गया। सभापति सी.पी. राधाकृष्णन ने खड़गे का वक्तव्य पूरा होने से पहले ही सदन की कार्यवाही स्थगित कर दी। दोबारा कार्यवाही शुरू होने पर खड़गे काली पट्टी बांधकर सदन पहुंचे और कहा कि छात्रों पर हुई पुलिस कार्रवाई से उन्हें गहरा दुख पहुंचा है। इसके बाद सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच फिर नारेबाजी शुरू हो गई, जिसके चलते राज्यसभा की कार्यवाही एक बार फिर स्थगित करनी पड़ी। कांग्रेस के कई सांसद भी छात्रों के समर्थन में काले कुर्ते और शर्ट पहनकर संसद पहुंचे।