- शैक्षणिक सुधारों का किया समर्थन
- सरकार और छात्रों से सार्थक संवाद की अपील

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मुंबई। अभिनेत्री प्रीति जिंटा ने दिल्ली में जारी छात्र आंदोलन और शिक्षा सुधार की मांग को लेकर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए कहा है कि छात्रों का समर्थन किया जाना चाहिए, लेकिन उनके शांतिपूर्ण आंदोलन को किसी भी कीमत पर "राष्ट्रविरोधी तत्वों" द्वारा हाईजैक नहीं होने देना चाहिए। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X (पूर्व में ट्विटर) पर साझा किए गए अपने विस्तृत पोस्ट में प्रीति ने कहा कि देश के युवाओं का भविष्य बेहतर बनाने के लिए शिक्षा व्यवस्था में सुधार जरूरी है, लेकिन विरोध प्रदर्शन का मूल उद्देश्य भटकना नहीं चाहिए। उन्होंने लिखा कि छात्रों की आवाज सुनी जानी चाहिए और उनकी मांगों पर गंभीरता से विचार होना चाहिए, मगर कुछ असामाजिक या राष्ट्रविरोधी तत्व यदि इस आंदोलन का इस्तेमाल अराजकता फैलाने के लिए करते हैं, तो इससे पूरे आंदोलन की विश्वसनीयता प्रभावित हो सकती है। प्रीति ने जोर देकर कहा कि आंदोलन का स्वरूप शांतिपूर्ण और रचनात्मक बना रहना चाहिए।
नफरत और विभाजन बढ़ रहाअपने पोस्ट में प्रीति जिंटा ने सोशल मीडिया पर बढ़ती नफरत और विभाजनकारी माहौल पर भी चिंता जताई। उन्होंने कहा कि ऑनलाइन लगातार बढ़ रही कटुता यह सोचने पर मजबूर करती है कि कहीं देश के भीतर और बाहर मौजूद कुछ नकारात्मक तत्व छात्रों के गुस्से और निराशा का इस्तेमाल अपने एजेंडे के लिए तो नहीं कर रहे। अभिनेत्री ने सवाल उठाया कि क्या ऐसे लोग छात्रों की भावनाओं को हथियार बनाकर देश में अस्थिरता पैदा करने की कोशिश कर रहे हैं। हालांकि उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि छात्रों की वास्तविक समस्याओं और उनकी चिंताओं को नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए। उनके मुताबिक, युवाओं की नाराजगी के पीछे मौजूद कारणों को समझना और उनका समाधान निकालना लोकतांत्रिक व्यवस्था की जिम्मेदारी है।
लोकतंत्र, कानून और संवाद पर भरोसाप्रीति जिंटा ने कहा कि वह हमेशा मेहनत, समान अवसर और उत्कृष्टता में विश्वास करती हैं और इन मूल्यों से किसी भी परिस्थिति में समझौता नहीं होना चाहिए। उन्होंने लोकतंत्र, कानून-व्यवस्था और सरकार पर भरोसा जताते हुए उम्मीद व्यक्त की कि सरकार और छात्र संगठन बातचीत के जरिए समाधान निकालेंगे। उन्होंने अपने संदेश में कहा कि दोनों पक्षों को सार्थक और सकारात्मक संवाद करना चाहिए, ताकि आंदोलन से किसी भी तरह के गलत इरादों या निहित स्वार्थों को अलग किया जा सके। उनका मानना है कि स्वस्थ संवाद ही ऐसा रास्ता है, जिससे छात्रों का भविष्य सुरक्षित होगा और लोकतांत्रिक व्यवस्था भी मजबूत बनेगी। उन्होंने अपने संदेश का समापन "जय हिंद" के साथ किया।
पहले सोनम वांगचुक और छात्रों का भी किया था समर्थनइससे पहले प्रीति जिंटा सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक और आंदोलन कर रहे छात्रों के समर्थन में भी खुलकर सामने आई थीं। उन्होंने सरकार से अपील की थी कि वांगचुक की लंबी भूख हड़ताल के कारण उनकी सेहत और अधिक खराब होने से पहले उनसे तथा छात्र संगठनों से सार्थक बातचीत शुरू की जाए। अपने पहले पोस्ट में उन्होंने लिखा था कि सोनम वांगचुक और छात्र भारत के युवाओं तथा शिक्षा व्यवस्था के बेहतर भविष्य के लिए संघर्ष कर रहे हैं। उन्होंने वांगचुक से अनशन समाप्त करने की भी अपील करते हुए कहा था कि उनकी सेहत भी इस लड़ाई जितनी ही महत्वपूर्ण है। प्रीति ने छात्रों और वांगचुक के प्रति अपना पूरा समर्थन जताते हुए शिक्षा व्यवस्था को बेहतर बनाने की इस लड़ाई को देश के भविष्य से जुड़ा महत्वपूर्ण मुद्दा बताया।