'टेलीप्रॉम्प्टर के बिना वंदे मातरम् सुनाकर दिखाएं पीएम मोदी और शाह': संसद सत्र के पहले दिन संजय राउत का हमला

    20-Jul-2026
Total Views |
Image Source:(Internet)

नई दिल्ली। संसद के मानसून सत्र के पहले दिन राजनीतिक माहौल उस समय और गर्म हो गया, जब शिवसेना (यूबीटी) सांसद संजय राउत ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को खुली चुनौती देते हुए कहा कि वे बिना टेलीप्रॉम्प्टर के 'वंदे मातरम्' सुनाकर दिखाएं। राउत की यह टिप्पणी ऐसे समय आई है, जब केंद्र सरकार प्रिवेंशन ऑफ इंसल्ट्स टू नेशनल ऑनर एक्ट, 1971 में संशोधन विधेयक लाने जा रही है। प्रस्तावित संशोधन के तहत राष्ट्रीय गीत 'वंदे मातरम्' का अपमान करने या उसके गायन में बाधा डालने को दंडनीय अपराध बनाने का प्रावधान किया गया है। संसद परिसर के बाहर मीडिया से बातचीत में राउत ने सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि देशभक्ति केवल कानून बनाकर साबित नहीं की जा सकती। उनके बयान के बाद राजनीतिक गलियारों में नई बहस छिड़ गई है।

'हमें कीड़े समझा, लेकिन आंदोलन देशभर में फैल गया'
संजय राउत ने कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के 'संसद मार्च' और शिक्षा सुधार आंदोलन का भी खुलकर समर्थन किया। उन्होंने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार ने इस आंदोलन की ताकत को कम करके आंका था। राउत ने कहा कि सरकार को लगा था कि आंदोलन को आसानी से खत्म कर दिया जाएगा, लेकिन आज जंतर-मंतर पर हजारों-लाखों युवा जुटे हैं और देश के बड़े शहरों में इसे समर्थन मिल रहा है। उन्होंने कहा कि मुंबई के शिवाजी पार्क में हुए प्रदर्शन में उद्धव ठाकरे, आदित्य ठाकरे सहित हजारों युवा और नागरिक शामिल हुए। पुणे, नागपुर और महाराष्ट्र के कई शहरों के साथ देशभर में आंदोलन लगातार फैल रहा है। राउत ने सवाल उठाया कि क्या सरकार लाखों प्रदर्शनकारियों को जेल में डालेगी या सबके खिलाफ सीबीआई और ईडी का इस्तेमाल करेगी। उन्होंने आरोप लगाया कि यदि सरकार के बस में होता तो जंतर-मंतर पर बैठे हर प्रदर्शनकारी पर जांच एजेंसियां छोड़ दी जातीं। (India Today)

'संसद नहीं जाने देंगे तो ईडी और सुप्रीम कोर्ट की ओर बढ़े मार्च'
राउत ने कहा कि यदि प्रदर्शनकारियों को संसद मार्ग तक मार्च की अनुमति नहीं मिलती है, तो उन्हें प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) मुख्यालय और सुप्रीम कोर्ट की ओर कूच करना चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि इन संस्थाओं ने देश को सबसे अधिक नुकसान पहुंचाया है। वहीं, सोनम वांगचुक से जुड़े मामले पर उन्होंने कहा कि न्यायिक प्रक्रिया को अदालत पर छोड़ देना चाहिए। उन्होंने जंतर-मंतर पर बैठे युवाओं की सराहना करते हुए कहा कि वहां मौजूद हर युवा स्वयं एक नेता है और उन्हें किसी नेतृत्व की आवश्यकता नहीं है। यह बयान ऐसे समय आया है, जब दिल्ली हाईकोर्ट ने सोनम वांगचुक को सफदरजंग अस्पताल से निजी अस्पताल ले जाने की मांग पर तत्काल राहत देने से इनकार किया है, जबकि उनकी पत्नी ने इस आदेश को डिवीजन बेंच में चुनौती दी है।

मानसून सत्र के बीच प्रदर्शन
इधर, सीजेपी से जुड़े कार्यकर्ता शिक्षा सुधार और परीक्षा व्यवस्था में जवाबदेही की मांग को लेकर संसद की ओर मार्च की तैयारी कर रहे हैं। इसके मद्देनज़र दिल्ली पुलिस ने संसद, जंतर-मंतर और नई दिल्ली क्षेत्र में कड़े सुरक्षा इंतजाम किए हैं। दूसरी ओर, संसद के भीतर विपक्ष सरकार को शिक्षा, परीक्षा प्रणाली और अन्य मुद्दों पर घेरने की रणनीति बना रहा है। ऐसे में 'वंदे मातरम्' विधेयक, सीजेपी आंदोलन और संजय राउत के तीखे बयान ने मानसून सत्र के पहले दिन ही राजनीतिक तापमान बढ़ा दिया है। आने वाले दिनों में इन मुद्दों पर संसद के भीतर और बाहर तीखी बहस देखने को मिल सकती है।