- नीट पेपर लीक और छात्रों पर कार्रवाई को लेकर घेरा

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नई दिल्ली। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष और कांग्रेस सांसद राहुल गांधी (Rahul Gandhi )ने नीट-यूजी 2026 पेपर लीक विवाद और छात्रों पर हुई पुलिस कार्रवाई को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर तीखा हमला बोला है। सोशल मीडिया मंच 'एक्स' पर जारी अपने संदेश में राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री को "भारत के इतिहास का सबसे युवा-विरोधी प्रधानमंत्री" बताया। उन्होंने आरोप लगाया कि लाखों छात्रों का भविष्य दांव पर लगने के बावजूद केंद्र सरकार शिक्षा व्यवस्था की विफलताओं पर जवाबदेही तय करने के बजाय आंदोलन कर रहे छात्रों पर बल प्रयोग कर रही है। राहुल गांधी ने कहा कि जब छात्र अपने अधिकार और न्याय की मांग लेकर सड़कों पर उतरे, तो उन्हें जवाब देने के बजाय लाठियां और हिरासत मिली। उनके अनुसार, यह लोकतंत्र और युवाओं दोनों के साथ अन्याय है।
'152 पेपर लीक, 7.5 करोड़ छात्र प्रभावित
राहुल गांधी ने अपने बयान में दावा किया कि देश में अब तक 152 पेपर लीक की घटनाएं हो चुकी हैं, जिनसे करीब 7.5 करोड़ छात्र प्रभावित हुए हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि इन मामलों में अब तक किसी बड़े दोषी को सजा नहीं मिली, जबकि मेहनत करने वाले छात्रों को ही परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान अपनी जिम्मेदारी निभाने में विफल रहे हैं, लेकिन प्रधानमंत्री उनसे इस्तीफा तक नहीं मांग रहे। राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि पेपर लीक करने वाले लोग खुलेआम घूम रहे हैं, जबकि अपने अधिकारों की मांग करने वाले छात्रों को पुलिस द्वारा घसीटा जा रहा है और उन पर लाठीचार्ज किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि यह सरकार केवल युवाओं की उपेक्षा नहीं कर रही, बल्कि उनके भविष्य पर हमला कर रही है।
'छात्र अपराधी नहीं, अपने अधिकार मांग रहे हैं'
राहुल गांधी ने अपने पोस्ट के साथ एक वीडियो भी साझा किया, जिसमें उन्होंने कहा कि दिल्ली की सड़कों पर प्रदर्शन कर रहे छात्र किसी अपराध के लिए नहीं, बल्कि एक निष्पक्ष और भरोसेमंद शिक्षा व्यवस्था की मांग के लिए निकले हैं। उन्होंने कहा कि भारत दुनिया का सबसे युवा देश है और सरकार का दायित्व युवाओं की आवाज सुनना है, न कि उन्हें डराना। राहुल ने कहा, "आंसू गैस छोड़ना और छात्रों पर लाठीचार्ज करना न लोकतांत्रिक है और न ही भारत की परंपरा।" उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार वर्षों से शिक्षा व्यवस्था में उठ रहे सवालों को नजरअंदाज कर रही है और युवाओं के सम्मान के साथ खिलवाड़ कर रही है। उनके अनुसार, छात्रों की मांगों पर गंभीर चर्चा होनी चाहिए, न कि उन्हें कानून-व्यवस्था का मुद्दा बनाकर दबाया जाना चाहिए।
पुलिस ने हिरासत के दावे किए खारिज
राहुल गांधी की यह टिप्पणी ऐसे समय आई है, जब नीट-यूजी 2026 पेपर लीक को लेकर देशभर में विरोध प्रदर्शन जारी हैं और संसद का मानसून सत्र भी पहले दिन हंगामे की भेंट चढ़ गया। कांग्रेस समेत विपक्षी दलों ने परीक्षा में कथित अनियमितताओं पर संसद में चर्चा की मांग की, जिसके चलते लोकसभा और राज्यसभा की कार्यवाही बार-बार बाधित हुई और अंततः दोनों सदनों को मंगलवार तक स्थगित कर दिया गया। वहीं, जंतर-मंतर से संसद की ओर मार्च कर रहे प्रदर्शनकारियों को रोकने के लिए दिल्ली पुलिस ने हल्का लाठीचार्ज किया और स्पष्ट किया कि नई दिल्ली जिले में भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (बीएनएसएस) की धारा 163 लागू है। पुलिस ने कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के संस्थापक अभिजीत दिपके को हिरासत में लेने के दावों को भी पूरी तरह खारिज करते हुए उन्हें भ्रामक बताया। विपक्ष के हमलों और छात्रों के आंदोलन के बीच शिक्षा व्यवस्था का मुद्दा अब संसद से लेकर सड़कों तक राष्ट्रीय बहस का केंद्र बन गया है।