- पुलिस पर लगाए गंभीर आरोप

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एबी न्यूज़ नेटवर्क। सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक को जंतर-मंतर से हटाकर अस्पताल में भर्ती किए जाने के बाद आंदोलन ने नया मोड़ ले लिया है। कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के संस्थापक एवं अध्यक्ष अभिजीत दिपके शुक्रवार को अपने समर्थकों के साथ दोबारा जंतर-मंतर पहुंचे और आंदोलन की कमान संभालते हुए अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल शुरू करने की घोषणा की। प्रदर्शनकारियों को संबोधित करते हुए दिपके ने आरोप लगाया कि दिल्ली पुलिस ने वांगचुक को जबरन प्रदर्शन स्थल से हटाया। उन्होंने दावा किया कि जब वे सुबह कुछ समय के लिए जंतर-मंतर से बाहर गए थे, तभी पुलिस वहां पहुंची और 20 दिनों से भूख हड़ताल पर बैठे वांगचुक को बलपूर्वक उठाकर ले गई। दिपके ने कहा कि एक वरिष्ठ सामाजिक कार्यकर्ता के साथ इस तरह का व्यवहार लोकतांत्रिक मूल्यों के खिलाफ है और इससे आंदोलनकारियों में नाराजगी है।
'मुझे भी पीटा गया' - दीपके
अभिजीत दिपके ने यह भी आरोप लगाया कि जैसे ही उन्हें वांगचुक को हटाए जाने की जानकारी मिली और वे जंतर-मंतर लौटने लगे, रास्ते में पुलिस ने उनके साथ भी मारपीट की। उन्होंने दावा किया कि उनके साथ दुर्व्यवहार किया गया और उन्हें सड़क पर पीटा गया। दिपके ने पुलिस की कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए कहा कि शांतिपूर्ण आंदोलन कर रहे लोगों के साथ इस तरह का व्यवहार स्वीकार्य नहीं है। उन्होंने आरोप लगाया कि आंदोलन को दबाने के लिए बल प्रयोग किया जा रहा है। हालांकि, इन आरोपों पर दिल्ली पुलिस की ओर से तत्काल कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। पूरे घटनाक्रम के बाद जंतर-मंतर पर माहौल तनावपूर्ण बना हुआ है और आंदोलनकारी लगातार सरकार तथा प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी कर रहे हैं।
20 जुलाई को संसद मार्च का ऐलान
दिपके ने घोषणा की कि वह शनिवार से स्वयं भी अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर बैठेंगे और वांगचुक के आंदोलन को आगे बढ़ाएंगे। उन्होंने समर्थकों से आंदोलन में शामिल होने और इसे शांतिपूर्ण तरीके से जारी रखने की अपील की। इस दौरान उन्होंने 20 जुलाई को संसद मार्च निकालने का भी ऐलान किया, जिसे आंदोलन का अगला बड़ा चरण बताया जा रहा है। दिपके ने कहा कि यह संघर्ष केवल एक व्यक्ति का नहीं, बल्कि उन सभी लोगों की आवाज है जो व्यवस्था में बदलाव और जवाबदेही की मांग कर रहे हैं। वांगचुक के अस्पताल में भर्ती होने के बाद आंदोलन का नेतृत्व अब दिपके के हाथों में दिखाई दे रहा है। ऐसे में आगामी संसद मार्च और सरकार की प्रतिक्रिया पर सभी की नजरें टिकी हुई हैं।