- सफदरजंग अस्पताल में भर्ती, लेकिन अनिश्चितकालीन अनशन नहीं टूटा

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नई दिल्ली। जलवायु कार्यकर्ता और शिक्षा सुधारों को लेकर लंबे समय से आवाज उठाने वाले सोनम वांगचुक की अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल अब अस्पताल से भी जारी रहेगी। वांगचुक को शनिवार को दिल्ली के जंतर-मंतर से हटाकर सफदरजंग अस्पताल में भर्ती कराया गया, लेकिन उनकी पार्टी कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) ने स्पष्ट किया कि उन्होंने अपना अनशन समाप्त नहीं किया है। पार्टी ने बयान जारी कर कहा कि वांगचुक अस्पताल में रहते हुए भी भूख हड़ताल जारी रखेंगे और समर्थकों से उनके स्वास्थ्य के लिए प्रार्थना करने की अपील की। गौरतलब है कि वांगचुक 28 जून से कथित परीक्षा अनियमितताओं के विरोध में अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर बैठे हैं। लगातार 20 दिनों तक भोजन न करने के कारण उनकी तबीयत बिगड़ने के बाद उन्हें अस्पताल ले जाया गया। इस घटनाक्रम के बाद उनके आंदोलन और स्वास्थ्य दोनों को लेकर देशभर में चर्चा तेज हो गई है।
पत्नी ने दूसरे अस्पताल ले जाने की मांग की
वांगचुक की पत्नी गीतांजलि डी. अंगमो ने सफदरजंग अस्पताल के चिकित्सा अधीक्षक को पत्र लिखकर उन्हें जल्द से जल्द डिस्चार्ज करने और परिवार की पसंद के अस्पताल में भर्ती कराने की मांग की है। उन्होंने आरोप लगाया कि अस्पताल द्वारा स्वास्थ्य संबंधी जानकारी स्पष्ट रूप से साझा नहीं की जा रही है। उनके अनुसार, 17 जुलाई की शाम 4:16 बजे वांगचुक का पोटैशियम स्तर 4.3 दर्ज किया गया था, लेकिन अगले ही दिन अस्पताल ने इसे 2.9 बताया, जिससे परिवार को संदेह हुआ। अंगमो का कहना है कि बार-बार अनुरोध करने के बावजूद मेडिकल रिपोर्ट की डिजिटल या हार्ड कॉपी उपलब्ध नहीं कराई गई। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि वांगचुक की निगरानी कर रहे उनके निजी चिकित्सकों को अस्पताल में उनका परीक्षण करने की अनुमति नहीं दी गई। इन परिस्थितियों में परिवार ने अस्पताल के इलाज और पारदर्शिता पर भरोसा खोने की बात कही है।
हाईकोर्ट के आदेश का हवाला
वांगचुक को जंतर-मंतर से हटाकर अस्पताल ले जाने की कार्रवाई को लेकर भी विवाद गहरा गया है। उनकी पार्टी ने आरोप लगाया कि दिल्ली पुलिस ने बलपूर्वक कार्रवाई की, जबकि पुलिस का कहना है कि यह कदम दिल्ली हाईकोर्ट के निर्देशों के अनुरूप उठाया गया। अस्पताल में भर्ती होने के बाद भी वांगचुक के समर्थक आंदोलन जारी रखने की बात कह रहे हैं। इस पूरे घटनाक्रम ने प्रशासन, पुलिस और अस्पताल की भूमिका पर कई सवाल खड़े कर दिए हैं। वहीं, वांगचुक के निजी चिकित्सक ने भी अस्पताल द्वारा बताए गए स्वास्थ्य संबंधी कुछ दावों पर सवाल उठाए हैं। ऐसे में मामला केवल स्वास्थ्य तक सीमित नहीं रह गया, बल्कि पारदर्शिता और प्रशासनिक प्रक्रिया को लेकर भी बहस का विषय बन गया है।
20 जुलाई का संसद मार्च रहेगा जारी
वांगचुक की ओर से प्रस्तावित 20 जुलाई का संसद मार्च तय कार्यक्रम के अनुसार आयोजित किया जाएगा। उनके करीबी चिकित्सक डॉ. दिघे के अनुसार, वांगचुक की पत्नी ने प्रशासन को सूचित किया है कि यदि स्वास्थ्य कारणों से वांगचुक स्वयं मार्च में शामिल नहीं हो पाए, तो उनकी जगह वह इस प्रदर्शन का नेतृत्व करेंगी। आंदोलन से जुड़े लोगों का कहना है कि यह केवल एक व्यक्ति का विरोध नहीं, बल्कि परीक्षा व्यवस्था में कथित अनियमितताओं के खिलाफ व्यापक अभियान है। अस्पताल में भर्ती होने के बावजूद वांगचुक का अनशन जारी रहने का फैसला इस आंदोलन को और अधिक राजनीतिक एवं सामाजिक महत्व दे सकता है। अब सबकी नजर उनके स्वास्थ्य, अस्पताल की अगली मेडिकल रिपोर्ट और 20 जुलाई को प्रस्तावित संसद मार्च पर टिकी हुई है।