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एबी न्यूज़ नेटवर्क। राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरद पवार गुट) की सांसद सुप्रिया सुले ने पर्यावरण कार्यकर्ता और पद्मश्री सम्मानित सोनम वांगचुक की भूख हड़ताल को लेकर केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला है। नई दिल्ली के जंतर-मंतर पर NEET परीक्षा पेपर लीक मामले में केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर पिछले 19 दिनों से अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर बैठे वांगचुक की बिगड़ती सेहत पर चिंता जताते हुए सुले ने कहा कि "सोनम वांगचुक सिर्फ उनके परिवार या समर्थकों के लिए नहीं, बल्कि पूरे देश के लिए महत्वपूर्ण हैं।" उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार का रवैया बेहद असंवेदनशील रहा है और इतने लंबे समय से जारी आंदोलन के बावजूद सरकार की ओर से बातचीत या समाधान की कोई गंभीर पहल नहीं की गई। सुले ने कहा कि कम से कम सरकार का कोई प्रतिनिधि वांगचुक से मिलने जा सकता था, लेकिन ऐसा भी नहीं हुआ। उन्होंने सरकार से अपील की कि वह इस मामले को गंभीरता से ले और आंदोलनकारियों के साथ संवाद स्थापित करे।
NEET विवाद पूरे देश के छात्रों से जुड़ा मुद्दा
सुप्रिया सुले ने कहा कि NEET परीक्षा में कथित गड़बड़ियां किसी एक व्यक्ति के साथ अन्याय नहीं हैं, बल्कि देशभर के लाखों विद्यार्थियों और उनके परिवारों के भविष्य से जुड़ा गंभीर विषय हैं। उनके अनुसार, इस मुद्दे पर संसद और सरकार दोनों स्तरों पर व्यापक चर्चा होनी चाहिए थी, लेकिन सरकार ने ऐसा कोई प्रयास नहीं किया। उन्होंने बताया कि जब उन्होंने सार्वजनिक रूप से सोनम वांगचुक और सामाजिक कार्यकर्ता अभिजीत दीपके के समर्थन में जाने की घोषणा की, तब उनके लोकसभा क्षेत्र के सैकड़ों लोगों ने भी इस कदम का समर्थन किया। हालांकि उन्होंने वांगचुक से स्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए भूख हड़ताल समाप्त करने की अपील भी की, लेकिन साथ ही यह भी कहा कि वांगचुक अपने सिद्धांतों पर अडिग हैं और अपनी मांगें पूरी करवाने के लिए प्रतिबद्ध हैं। सुले ने कहा कि विपक्ष इस मुद्दे को पूरी मजबूती से उठाएगा और सरकार को जवाबदेह बनाने का प्रयास जारी रहेगा।
संविधान संशोधन विधेयक पर और बहस की मांग
सुप्रिया सुले ने बातचीत के दौरान प्रस्तावित संविधान संशोधन और डिलिमिटेशन से जुड़े मुद्दों पर भी अपनी पार्टी का रुख स्पष्ट किया। उन्होंने कहा कि संविधान संशोधन विधेयक जैसे महत्वपूर्ण विषय पर व्यापक राष्ट्रीय चर्चा की आवश्यकता है और वर्तमान स्वरूप में उनकी पार्टी इसका समर्थन नहीं करती। उन्होंने कहा कि विपक्ष की स्पष्ट राय है कि इस विधेयक को लागू नहीं किया जाना चाहिए। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि यदि डिलिमिटेशन से जुड़ा विधेयक ही पारित नहीं होता, तो उससे जुड़े अन्य राजनीतिक समीकरणों पर चर्चा का कोई औचित्य नहीं रह जाता। वन नेशन-वन इलेक्शन के मुद्दे पर उन्होंने कहा कि इस विषय पर अभी भी विभिन्न स्तरों पर विचार-विमर्श जारी है और अंतिम निर्णय से पहले सभी पक्षों की राय लेना आवश्यक है। उनके अनुसार, लोकतांत्रिक व्यवस्था में बड़े संवैधानिक बदलाव व्यापक सहमति से ही किए जाने चाहिए।
भाई की अंतिम इच्छा का किया जिक्र
सुप्रिया सुले ने अपने परिवार से जुड़े एक भावनात्मक विषय पर भी खुलकर बात की। उन्होंने कहा कि उनके भाई के निधन को अब लगभग पांच महीने हो चुके हैं और परिवार धीरे-धीरे इस दुख से उबरने की कोशिश कर रहा है। सुले के अनुसार, उनके भाई की अंतिम इच्छा थी कि दोनों राजनीतिक दल आपसी मतभेद भुलाकर साथ आएं और देशहित में मिलकर काम करें। उन्होंने बताया कि उनकी ओर से इस दिशा में प्रयास भी किए गए, लेकिन दूसरी तरफ से कोई सकारात्मक प्रतिक्रिया नहीं मिली। इससे यह स्पष्ट हो गया कि ऐसा संभव नहीं है और अब उस विषय को समाप्त मान लिया गया है। उन्होंने कहा कि उनका परिवार और उनकी पार्टी आत्मसम्मान के साथ अपनी राजनीतिक और जनसेवा की जिम्मेदारियां निभाती रहेगी। साथ ही उन्होंने दोहराया कि लोकतंत्र में संवाद, संवेदनशीलता और जनता के मुद्दों पर जवाबदेही सबसे महत्वपूर्ण होनी चाहिए।