- एयरपोर्ट पर भी उपलब्ध होगी पर्यटन पुस्तिका

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नागपुर। नागपुर को महाराष्ट्र के प्रमुख पर्यटन केंद्र के रूप में विकसित करने की दिशा में महानगर पालिका ने बड़ी पहल शुरू कर दी है। इसी उद्देश्य से नागपुर महानगरपालिका मुख्यालय में स्थायी समिति की सभापति शिवानी दाणी वाखरे की अध्यक्षता में एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई, जिसमें मनपा आयुक्त डॉ. विपिन इटनकर सहित वरिष्ठ अधिकारियों ने शहर के पर्यटन विकास की रूपरेखा पर विस्तार से चर्चा की। बैठक में नागपुर के ऐतिहासिक स्थलों, सांस्कृतिक विरासत, प्राचीन मंदिरों और शहर की विशिष्ट पहचान को देश-विदेश के पर्यटकों तक पहुंचाने के लिए व्यापक योजना तैयार करने पर सहमति बनी। प्रस्ताव के तहत शहर के प्रमुख पर्यटन स्थलों की जानकारी देने वाली आकर्षक सूचना पुस्तिका तैयार की जाएगी, जिसे नागपुर आने वाले पर्यटकों को उपलब्ध कराया जाएगा। शिवानी दाणी वाखरे ने कहा कि पर्यटन केवल आर्थिक गतिविधि नहीं, बल्कि शहर की संस्कृति, इतिहास और पहचान को मजबूत करने का माध्यम भी है। उन्होंने विश्वास जताया कि छोटी-छोटी पहलें भी नागपुर की छवि को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान दिला सकती हैं।
QR कोड से मिलेगी शहर की जानकारी
पर्यटन विकास योजना के तहत नागपुर के लगभग 100 प्रमुख चौकों, स्मारकों और ऐतिहासिक स्थलों की जानकारी डिजिटल माध्यम से उपलब्ध कराने का निर्णय लिया गया है। प्रत्येक स्थल पर लगाए जाने वाले QR कोड को स्कैन कर पर्यटक ऑडियो-वीडियो प्रस्तुति के माध्यम से उस स्थान का इतिहास, महत्व और विशेषताएं जान सकेंगे। इसके अलावा पर्यटन पुस्तिकाएं केवल नागपुर ही नहीं, बल्कि महाराष्ट्र के प्रमुख स्थानों और डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर भी उपलब्ध कराई जाएंगी, ताकि शहर पहुंचने वाले पर्यटक पहले ही नागपुर के प्रमुख आकर्षणों से परिचित हो सकें। बैठक में यह भी तय किया गया कि महाराष्ट्र पर्यटन विकास निगम (MTDC) तथा अन्य संबंधित संस्थाओं के सहयोग से इस योजना को प्रभावी ढंग से लागू किया जाएगा। नगर आयुक्त डॉ. विपिन इटनकर ने अधिकारियों को पर्यटन सुविधाओं के विकास के लिए विस्तृत कार्ययोजना तैयार करने के निर्देश दिए।
मारबत, सावजी उत्सव और बुनकर संस्कृति को बढ़ावा
बैठक में नागपुर की सांस्कृतिक पहचान को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर स्थापित करने के लिए कई नए प्रस्ताव भी सामने आए। शिवानी दाणी वाखरे ने शहर के प्रसिद्ध मारबत उत्सव का व्यापक प्रचार-प्रसार करने की बात कही, ताकि देश-विदेश से अधिक संख्या में पर्यटक इस अनूठी परंपरा को देखने नागपुर आएं। इसके साथ ही सावजी उत्सव और बुनकर उत्सव जैसे आयोजनों को बड़े स्तर पर आयोजित करने का सुझाव दिया गया, जिससे नागपुर की पारंपरिक खानपान संस्कृति और बुनाई कला को नई पहचान मिल सके। बैठक में 100 वर्ष से अधिक पुराने संस्थानों के इतिहास और योगदान को प्रदर्शित करने के लिए 'शताब्दी संग्रहालय' स्थापित करने का प्रस्ताव भी रखा गया। वहीं, आठ रास्ता लेआउट स्थित डॉ. हेडगेवार रीडिंग रूम में मेडिकल विद्यार्थियों के लिए आधुनिक अध्ययन सुविधाएं विकसित करने पर भी चर्चा हुई। इन पहलों का उद्देश्य पर्यटन के साथ-साथ शिक्षा और सांस्कृतिक विरासत को भी सशक्त बनाना है।
पर्यटन के साथ विकास की कई योजनाओं पर भी मंथन
बैठक में पर्यटन विकास के अलावा नगर निगम की कई महत्वपूर्ण परियोजनाओं पर भी चर्चा की गई। इनमें महापौर परिषद और स्थायी समिति की विभिन्न योजनाएं, इंटरनेशनल लैंग्वेज ट्यूशन सेंटर, सुषमा स्वराज प्रतियोगी परीक्षा प्रोत्साहन योजना, गणितीय उद्यान (मैथमेटिकल गार्डन) का निर्माण, धन घाट का विकास, नए प्राथमिक विद्यालयों और औषधालयों के निर्माण सहित कई नागरिक सुविधाओं से जुड़े प्रस्ताव शामिल रहे। अधिकारियों का मानना है कि पर्यटन और बुनियादी विकास परियोजनाओं को साथ लेकर चलने से नागपुर की समग्र प्रगति को नई गति मिलेगी। बैठक में अतिरिक्त नगर आयुक्त अंकित, मिलिंद मेश्राम, अधीक्षण अभियंता मनोज तालेवार, मुख्य वित्त अधिकारी सदाशिव शेलके, उपायुक्तों सहित विभिन्न विभागों के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे। नगर निगम का लक्ष्य है कि आने वाले वर्षों में नागपुर केवल ऑरेंज सिटी के रूप में ही नहीं, बल्कि इतिहास, संस्कृति, खानपान और विरासत पर्यटन के प्रमुख केंद्र के रूप में भी अपनी अलग पहचान स्थापित करे।