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नागपुर। नागपुर में 20 वर्षीय NEET अभ्यर्थी की आत्महत्या का मामला सामने आया है, जिसने परीक्षा प्रणाली और छात्रों पर पड़ने वाले मानसिक दबाव को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। यह घटना करीब 14 दिन पहले की बताई जा रही है। परिजनों का आरोप है कि पेपर लीक विवाद और उसके बाद परीक्षा के पुनः आयोजन (री-एग्जाम) के फैसले ने छात्रा को गहरे मानसिक तनाव में डाल दिया, जिसके कारण उसने यह कदम उठाया। छात्रा अपने परिवार के साथ नागपुर में रह रही थी, जबकि उसका परिवार मूल रूप से मध्य प्रदेश के मऊगंज जिले का निवासी है।
परीक्षा विवाद और मानसिक तनाव का आरोप
परिजनों के अनुसार, छात्रा NEET परीक्षा को लेकर बेहद आशान्वित थी और उसे अच्छे अंकों की पूरी उम्मीद थी। लेकिन जैसे ही पेपर लीक और परीक्षा रद्द होने की खबर सामने आई, वह मानसिक रूप से टूट गई। पिता ने बताया कि परिवार ने उसकी पढ़ाई के लिए लाखों रुपये का कर्ज लिया था और वे उम्मीद कर रहे थे कि बेटी डॉक्टर बनेगी। उन्होंने कहा कि परीक्षा के बाद वह आत्मविश्वास से भरी हुई थी, लेकिन विवाद के बाद उसका मनोबल गिर गया और वह गहरे अवसाद में चली गई।
सुसाइड नोट और राजनीतिक प्रतिक्रिया
परिजनों का दावा है कि घर लौटने के बाद उन्हें एक किताब में कथित सुसाइड नोट मिला, जिसमें छात्रा ने लिखा था कि उसे अच्छे अंक आने की उम्मीद थी, लेकिन री-एग्जाम की स्थिति में फिर से वैसा प्रदर्शन करने का भरोसा नहीं है। नोट में उसने अपने माता-पिता से माफी मांगते हुए खुद को असफल मानने की बात कही। पिता ने कहा कि यह पूरा सिस्टम की विफलता है, जिसने उनके वर्षों के प्रयास को व्यर्थ कर दिया। इस मामले में कांग्रेस युवा अध्यक्ष घंघोरिया ने परिवार से मुलाकात कर उन्हें आर्थिक और शैक्षणिक कर्ज को लेकर सहायता का आश्वासन दिया। उन्होंने कहा कि यह घटना सिस्टम की विफलता का परिणाम है और परिवार के साथ हर संभव सहयोग किया जाएगा।