दिल्ली के स्टार्टअप ‘CarryMen’ ने शुरू की पर्सनल शॉपिंग असिस्टेंट सेवा

    04-Jun-2026
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नई दिल्ली। दिल्ली के भीड़भाड़ वाले बाजारों में खरीदारी को आसान बनाने के उद्देश्य से एक नया स्टार्टअप CarryMen चर्चा में आ गया है। इस स्टार्टअप ने दिल्ली के प्रसिद्ध शॉपिंग हब Lajpat Nagar Central Market में अपनी ऑन-डिमांड असिस्टेंट सेवा शुरू की है, जहां ग्राहक शॉपिंग के दौरान बैग उठाने, कतार में लगने और सामान ले जाने के लिए हेल्पर्स को हायर कर सकते हैं। यह सेवा अप्रैल से शुरू हुई है और तेजी से लोकप्रिय हो रही है। स्टार्टअप के अनुसार, यह सेवा विशेष रूप से बुजुर्गों, बच्चों के साथ आने वाले परिवारों और भारी खरीदारी करने वाले ग्राहकों के लिए बनाई गई है। इसकी कीमत 79 रूपये प्रति 30 मिनट और 149 रूपये प्रति घंटे तय की गई है, जबकि ग्राहक इसे अधिकतम चार घंटे तक बुक कर सकते हैं। असिस्टेंट्स न केवल बैग कैरी करते हैं, बल्कि पार्किंग ढूंढने, मेट्रो स्टेशन तक मार्गदर्शन देने, लंबी फूड लाइनों में खड़े रहने और जरूरत पड़ने पर छाता, फोल्डेबल चेयर, बेबी स्ट्रोलर और मोबाइल चार्जिंग जैसी सुविधाएं भी उपलब्ध कराते हैं। कंपनी का दावा है कि इस प्लेटफॉर्म से जुड़े असिस्टेंट्स प्रति माह 18,000 रूपये तक कमा सकते हैं, जिससे यह एक संगठित गिग-इकोनॉमी अवसर के रूप में भी देखा जा रहा है।

सोशल मीडिया पर वायरल, लेकिन शुरू हुआ बड़ा विवाद
‘You Shop, We Carry’ टैगलाइन के साथ यह स्टार्टअप सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गया है, जहां कई लोग इसे भीड़भाड़ वाले बाजारों के लिए एक व्यावहारिक और उपयोगी समाधान बता रहे हैं। कंपनी का कहना है कि भविष्य में इस सेवा का विस्तार Chandni Chowk और Sarojini Nagar Market जैसे प्रमुख बाजारों तक किया जाएगा। हालांकि, इस पहल पर बहस भी तेज हो गई है। आलोचकों का कहना है कि यह सेवा पुराने ‘कुली सिस्टम’ का आधुनिक रूप हो सकती है, जिससे श्रमिक गरिमा और शहरी वर्ग व्यवस्था पर सवाल उठते हैं।

दूसरी ओर, कई लोग इस मॉडल का समर्थन करते हुए इसे रोजगार सृजन और असंगठित क्षेत्र को संगठित करने वाला कदम बता रहे हैं। उनके अनुसार, यह उन लोगों के लिए कमाई का नया अवसर है, जिनके पास सीमित रोजगार विकल्प हैं। इसी तरह, यह स्टार्टअप अब केवल एक सेवा नहीं बल्कि एक सामाजिक बहस का विषय बन गया है जहां एक ओर इसे सुविधा और नवाचार माना जा रहा है, वहीं दूसरी ओर इसे श्रम की नई परिभाषा को लेकर आलोचना भी झेलनी पड़ रही है।