- पार्टी ने जारी किया नया कारण बताओ नोटिस, अयोग्यता की चेतावनी

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मुंबई/नई दिल्ली। शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) में जारी राजनीतिक उथल-पुथल के बीच पार्टी नेतृत्व ने अपने गैरहाजिर सांसदों के खिलाफ सख्त रुख अपनाया है। लोकसभा में पार्टी के मुख्य सचेतक (चीफ व्हिप) अनिल देसाई ने अनुपस्थित सांसदों को नया ‘कारण बताओ नोटिस’ जारी किया है। नोटिस में सांसदों को 24 घंटे के भीतर लिखित स्पष्टीकरण देने का निर्देश दिया गया है। पार्टी ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि निर्धारित समय सीमा में जवाब नहीं दिया गया तो यह माना जाएगा कि संबंधित सांसदों ने स्वेच्छा से पार्टी की सदस्यता छोड़ दी है। इसके बाद उनके खिलाफ भारतीय संविधान की दसवीं अनुसूची, यानी दल-बदल विरोधी कानून के तहत कार्रवाई की जाएगी। इस घटनाक्रम ने महाराष्ट्र की राजनीति में हलचल तेज कर दी है।
संसदीय दल की बैठक में दिखी फूट, नौ में से केवल तीन सांसद पहुंचे
संकट उस समय और गहरा गया जब गुरुवार को नई दिल्ली में आयोजित शिवसेना (यूबीटी) संसदीय दल की अनिवार्य बैठक में पार्टी के अधिकांश सांसद अनुपस्थित रहे। पार्टी के नौ लोकसभा सांसदों में से केवल अरविंद सावंत, अनिल देसाई और राजाभाऊ वाजे ही बैठक में शामिल हुए। वहीं नागेश आष्टीकर, संजय देशमुख, संजय जाधव, संजय दीना पाटिल, ओमप्रकाश राजेनिंबालकर और भाऊसाहेब वाकचौरे बैठक से नदारद रहे। इसके बाद पार्टी नेतृत्व ने इसे गंभीर अनुशासनहीनता मानते हुए कार्रवाई की प्रक्रिया शुरू कर दी। राज्यसभा सांसद संजय राउत ने कहा कि अनुपस्थित सांसदों के खिलाफ अयोग्यता की कार्रवाई शुरू कर दी गई है और पार्टी उन्हें अयोग्य घोषित कराने के लिए हरसंभव प्रयास करेगी।
‘ऑपरेशन टाइगर’ से बढ़ी हलचल, शिंदे गुट में शामिल होने की अटकलें तेज
राजनीतिक गलियारों में चर्चित ‘ऑपरेशन टाइगर’ के बीच यह संकट और गहरा गया है। शिवसेना विधायक परिषद सदस्य चंद्रकांत रघुवंशी ने दावा किया है कि शिवसेना (यूबीटी) के छह सांसद मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना में विश्वास जता चुके हैं और उनके गुट में शामिल हो गए हैं। हालांकि संबंधित सांसदों की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। इस बीच उद्धव ठाकरे गुट अपनी संगठनात्मक पकड़ मजबूत करने और संभावित टूट को रोकने के लिए लगातार प्रयास कर रहा है। आने वाले दिनों में सांसदों के जवाब और पार्टी की आगे की कार्रवाई महाराष्ट्र की राजनीति की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।