ईंधन क्रांति की ओर भारत: सरकार ने E100 फ्यूल को दी मंजूरी

    15-Jun-2026
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नई दिल्ली। भारत ने आयातित कच्चे तेल पर निर्भरता कम करने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाते हुए E100 फ्यूल के उपयोग को मंजूरी दे दी है। केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने नागपुर में एनडीए सरकार के 12 वर्ष पूर्ण होने के अवसर पर इसकी घोषणा की। उन्होंने बताया कि 100 प्रतिशत एथेनॉल आधारित ईंधन के कानूनी उपयोग के लिए आवश्यक नियामक ढांचा तैयार कर लिया गया है और संबंधित फाइल पर हस्ताक्षर भी किए जा चुके हैं। अभी देशभर में E20 पेट्रोल उपलब्ध है, जिसमें 20 प्रतिशत एथेनॉल और 80 प्रतिशत पेट्रोल होता है, जबकि E100 लगभग पूरी तरह एथेनॉल से निर्मित ईंधन है। सरकार इसे ऊर्जा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मान रही है।

क्या है E100 फ्यूल और क्यों है यह खास?
E100 फ्यूल लगभग 100 प्रतिशत इथेनॉल से बना होता है, जिसे गन्ना, मक्का, चावल तथा कृषि अपशिष्ट जैसे घरेलू स्रोतों से तैयार किया जा सकता है। चूंकि भारत अपनी तेल जरूरतों का बड़ा हिस्सा आयात करता है, इसलिए वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव का सीधा असर देश की अर्थव्यवस्था पर पड़ता है। ऐसे में घरेलू स्तर पर उत्पादित एथेनॉल आधारित ईंधन न केवल आयात बिल कम कर सकता है, बल्कि ऊर्जा सुरक्षा भी मजबूत कर सकता है। सरकार का मानना है कि E100 के व्यापक उपयोग से देश विदेशी तेल पर निर्भरता घटाने में सफल होगा।

ऑटो कंपनियां तैयार, किसानों को भी होगा लाभ
नितिन गडकरी के अनुसार, हुंडई, टोयोटा, एमजी मोटर और मारुति सुजुकी जैसी प्रमुख वाहन निर्माता कंपनियां उच्च इथेनॉल मिश्रण पर चलने वाले फ्लेक्स-फ्यूल वाहन बाजार में उतारने की तैयारी कर रही हैं। मारुति सुजुकी पहले ही अपनी लोकप्रिय वैगनआर का फ्लेक्स-फ्यूल संस्करण प्रदर्शित कर चुकी है। सरकार का मानना है कि इथेनॉल उत्पादन बढ़ने से किसानों को भी सीधा लाभ मिलेगा। गन्ना और मक्का जैसी फसलों की मांग बढ़ने से ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, एथेनॉल ब्लेंडिंग कार्यक्रम से अब तक एक लाख करोड़ रुपये से अधिक के तेल आयात की बचत हुई है तथा किसानों को लगभग 80 हजार करोड़ रुपये की अतिरिक्त आय प्राप्त हुई है।

चुनौतियां भी कम नहीं, धीरे-धीरे होगा बदलाव
हालांकि विशेषज्ञों का मानना है कि E100 फ्यूल की देशव्यापी स्वीकार्यता में समय लगेगा। वर्तमान में अधिकांश पेट्रोल वाहन पारंपरिक ईंधन या कम इथेनॉल मिश्रण के लिए डिजाइन किए गए हैं और वे सीधे E100 पर नहीं चल सकते। कुछ उपभोक्ताओं ने E20 के उपयोग से माइलेज में कमी और रखरखाव खर्च बढ़ने की शिकायत भी की है। पेट्रोलियम मंत्रालय के अनुसार, एथेनॉल की ऊर्जा घनत्व पेट्रोल की तुलना में कम होती है, जिससे ईंधन दक्षता प्रभावित हो सकती है। ऐसे में E100 की सफलता के लिए फ्लेक्स-फ्यूल वाहनों, पर्याप्त ईंधन अवसंरचना और उपभोक्ता जागरूकता का विस्तार आवश्यक होगा। भारत के लिए यह कदम हरित और आत्मनिर्भर ऊर्जा भविष्य की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है।