नाशिक विधान परिषद चुनाव: गिते बंधुओं की बगावत थमी या बढ़ा दबाव? एमएचएडीए प्रकरण के पत्र से तेज हुई राजनीतिक अटकलें

    11-Jun-2026
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Gite brothers Image Source:(Internet)
नाशिक। नाशिक (Nashik) स्थानीय प्राधिकरण निर्वाचन क्षेत्र से होने वाले विधान परिषद चुनाव के बीच भाजपा के बागी उम्मीदवार गोकुल गिते की संभावित उम्मीदवारी वापसी को लेकर राजनीतिक गलियारों में चर्चाओं का बाजार गर्म है। पिछले एक सप्ताह से महायुति के वरिष्ठ नेताओं द्वारा गोकुल गिते को मनाने के प्रयास जारी हैं। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यदि गोकुल गिते चुनाव मैदान में बने रहते हैं तो महायुति के अधिकृत उम्मीदवार नरेंद्र दराडे की राह मुश्किल हो सकती है। इसी बीच गिते बंधुओं से जुड़े घटनाक्रम और राज्य सरकार के एक पत्र ने इस पूरे मामले को नया मोड़ दे दिया है। विपक्षी और राजनीतिक हलकों में यह सवाल उठने लगा है कि क्या केवल मनाने की कोशिशें हो रही हैं या फिर दबाव की राजनीति भी पर्दे के पीछे सक्रिय है।
एमएचएडीए मामले के पत्र ने बढ़ाई सियासी हलचल
इस चर्चा को हवा देने वाला राज्य सरकार के विधि सलाहकार (संयुक्त सचिव) का वह पत्र है, जिसमें नाशिक के एमएचएडीए प्रकरण में गणेश गिते को उच्च न्यायालय से मिली अग्रिम जमानत को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देने के निर्देश दिए गए बताए जा रहे हैं। खास बात यह है कि गोकुल और गणेश गिते ने 1 जून को अपना नामांकन दाखिल किया था और उसी दिन इस पत्र के प्राप्त होने की जानकारी सामने आई। हालांकि पत्र 7 मई 2026 को तैयार किए जाने की बात कही जा रही है, लेकिन नामांकन के दिन ही उसके सामने आने से कई तरह की अटकलों को बल मिला है। राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि क्या गणेश गिते के कानूनी मामले और गोकुल गिते की संभावित उम्मीदवारी वापसी के बीच कोई संबंध है। हालांकि इस संबंध में अब तक किसी भी पक्ष की ओर से आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है।
गिते निवास पर नेताओं का जमावड़ा, बढ़ीं चर्चाएं
इस बीच शिवसेना के संकटमोचक माने जाने वाले उद्योग मंत्री उदय सामंत विशेष विमान से नाशिक पहुंचे और सीधे गणेश तथा गोकुल गिते के निवास पर पहुंचे। उनके साथ वरिष्ठ नेता गिरीश महाजन भी मौजूद रहे। बैठक के दौरान महायुति के अधिकृत उम्मीदवार नरेंद्र दराडे और विधायक किशोर दराडे भी गिते निवास पर उपस्थित थे। हालांकि राजनीतिक पर्यवेक्षकों का ध्यान इस बात ने खींचा कि जब उदय सामंत, गिते बंधु और शिवसेना के प्रमुख पदाधिकारी चर्चा में व्यस्त थे, तब दराडे बंधु अलग कमरे में बैठे रहे। इस घटनाक्रम ने राजनीतिक हलकों में नई चर्चाओं को जन्म दिया और यह सवाल उठने लगा कि आखिर बंद कमरे में क्या रणनीति तैयार की जा रही थी।

गोकुल गिते की चुप्पी और चेहरे के भाव बने चर्चा का विषय
सूत्रों के अनुसार, लगातार एक सप्ताह तक चली मनुहार और बैठकों के बाद गोकुल गिते ने उम्मीदवारी वापस लेने की इच्छा जताई है। हालांकि बैठक के दौरान उनके चेहरे के भाव और शारीरिक हावभाव ने कई सवाल खड़े कर दिए। राजनीतिक पर्यवेक्षकों का कहना है कि गोकुल गिते बेहद शांत, उदास और असहज नजर आए। उनके चेहरे पर नाराजगी और असंतोष के स्पष्ट संकेत दिखाई दिए। ऐसे में यह सवाल और गहरा हो गया है कि क्या वे स्वेच्छा से चुनाव मैदान से हट रहे हैं या फिर पार्टी नेतृत्व और वरिष्ठ मंत्रियों के आग्रह तथा दबाव के चलते यह फैसला ले रहे हैं। फिलहाल गिते बंधुओं और महायुति नेतृत्व की ओर से कोई आधिकारिक स्पष्टीकरण नहीं आया है, लेकिन नाशिक विधान परिषद चुनाव से पहले यह घटनाक्रम राज्य की राजनीति में चर्चा का प्रमुख विषय बन गया है।