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नागपुर। पेट्रोल की बढ़ती कीमतों के बीच वाहन चालकों को राहत देने के उद्देश्य से सरकार ने ई-85 पेट्रोल को बढ़ावा देना शुरू किया है। 85 प्रतिशत इथेनॉल और 15 प्रतिशत पेट्रोल के मिश्रण से तैयार यह ईंधन सामान्य पेट्रोल की तुलना में लगभग 18 से 20 रुपए प्रति लीटर सस्ता बताया जा रहा है। नागपुर में फिलहाल भारत पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड (बीपीसीएल) ने उमरेड रोड, मेडिकल चौक, मानेवाड़ा और बायरामजी टाउन स्थित चार पेट्रोल पंपों पर ई-85 पेट्रोल उपलब्ध कराने की व्यवस्था की है। आने वाले समय में शहर के अन्य पेट्रोल पंपों पर भी इसकी उपलब्धता बढ़ने की संभावना है। हालांकि इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन (आईओसी) और हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड (एचपीसीएल) के आउटलेट्स पर अभी यह ईंधन उपलब्ध नहीं है, लेकिन आने वाले महीनों में वहां भी इसकी बिक्री शुरू होने की उम्मीद जताई जा रही है।
मानसून में बढ़ सकती हैं चुनौतियां, डीलरों ने जताई चिंता
जहां एक ओर यह ईंधन पर्यावरण के लिए बेहतर और उपभोक्ताओं के लिए किफायती माना जा रहा है, वहीं पेट्रोल पंप संचालकों ने इसके उपयोग और भंडारण को लेकर कई चिंताएं व्यक्त की हैं। डीलरों के अनुसार इथेनॉल मिश्रित ईंधन पानी के प्रति अत्यंत संवेदनशील होता है। यदि इसमें पानी की एक बूंद भी मिल जाए तो इथेनॉल और पेट्रोल अलग हो सकते हैं, जिससे ईंधन की गुणवत्ता प्रभावित हो सकती है। ऐसी स्थिति में वाहन के इंजन को नुकसान पहुंचने या वाहन के अचानक बंद होने की आशंका रहती है। विशेष रूप से मानसून के दौरान यह जोखिम अधिक बढ़ जाता है और दोपहिया वाहनों पर इसका प्रभाव ज्यादा पड़ सकता है।
मजबूत इंफ्रास्ट्रक्चर और उपयुक्त वाहनों की जरूरत
विशेषज्ञों का मानना है कि ई-85 पेट्रोल को सफलतापूर्वक अपनाने के लिए मजबूत आपूर्ति और भंडारण व्यवस्था विकसित करना आवश्यक है। यदि यह ईंधन लंबे समय तक वाहन या टैंक में बिना उपयोग के पड़ा रहे तो इसकी गुणवत्ता खराब हो सकती है, जिसके कारण टैंक की सफाई और अतिरिक्त रखरखाव की आवश्यकता पड़ सकती है। इसके अलावा बाजार में ई-85 अनुकूल वाहनों की संख्या बढ़ाना भी जरूरी है। विशेषज्ञों का कहना है कि उचित इंफ्रास्ट्रक्चर और जागरूकता के साथ यह ईंधन न केवल उपभोक्ताओं की लागत कम करेगा, बल्कि पर्यावरण संरक्षण के लक्ष्य को हासिल करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।