‘सुपर एल नीनो’ का खतरा गहराया! 9 मई के बाद देश में बढ़ सकती है भीषण गर्मी और हीटवेव

    06-May-2026
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एबी न्यूज़ नेटवर्क। उत्तर भारत में मई की शुरुआत में हुई हल्की बारिश और बादलों की वजह से लोगों को कुछ समय के लिए गर्मी से राहत जरूर मिली, लेकिन मौसम विभाग और अंतरराष्ट्रीय वैज्ञानिकों ने अब एक बड़े जलवायु खतरे को लेकर चेतावनी जारी की है। विशेषज्ञों के मुताबिक 9 मई के बाद मौसम तेजी से बदल सकता है और देश के कई हिस्सों में भीषण गर्मी, हीटवेव और गर्म रातों का दौर शुरू हो सकता है। इस खतरे की सबसे बड़ी वजह संभावित “सुपर एल नीनो” को माना जा रहा है। विश्व मौसम संगठन (WMO) और कई अंतरराष्ट्रीय क्लाइमेट मॉडल्स ने संकेत दिए हैं कि मई से जुलाई 2026 के बीच एल नीनो की स्थिति फिर से विकसित हो सकती है। रिपोर्ट्स के अनुसार, यदि प्रशांत महासागर के सतही तापमान सामान्य से 2 डिग्री सेल्सियस से अधिक बढ़ते हैं, तो इसे “सुपर एल नीनो” कहा जाता है। विशेषज्ञों का दावा है कि 2026 का एल नीनो पिछले 140 वर्षों में सबसे शक्तिशाली साबित हो सकता है।

प्रशांत महासागर में दिखा दुर्लभ पैटर्न
वैज्ञानिकों ने 2026 की शुरुआत में प्रशांत महासागर में एक असामान्य तापमान पैटर्न देखा है। इंडोनेशिया, मध्य अमेरिका और दक्षिण अमेरिका के तटों के पास एक साथ गर्म पानी जमा होने से महासागर में एक रिंग जैसी संरचना बन गई है। चीन के सेकेंड इंस्टीट्यूट ऑफ ओशनोग्राफी के प्रोफेसर ताओ लियान के अनुसार, पिछले 40 वर्षों में ऐसा पैटर्न पहली बार देखा गया है। वैज्ञानिकों का कहना है कि समुद्र के भीतर जमा अत्यधिक गर्मी मध्यम एल नीनो को “सुपर एल नीनो” में बदल सकती है। इंडोनेशिया के शोधकर्ताओं ने दावा किया है कि पूर्वी प्रशांत महासागर का तापमान पहले ही सामान्य से 5 डिग्री सेल्सियस अधिक हो चुका है और जुलाई के बाद इसमें और तेजी आ सकती है। मौसम विशेषज्ञों के मुताबिक इसका सीधा असर भारत सहित एशिया के कई देशों पर पड़ेगा।

भारत में कमजोर मानसून और खेती पर संकट
भारतीय मौसम विभाग (IMD) ने पहले ही संकेत दिए हैं कि इस साल मानसून सामान्य से कमजोर रह सकता है। आमतौर पर भारत में मानसून के दौरान लगभग 870 मिमी बारिश होती है, लेकिन इस वर्ष केवल 800 मिमी बारिश का अनुमान लगाया गया है। मानसून विफल होने की संभावना 35 प्रतिशत तक बताई गई है, जबकि सामान्य वर्षों में यह केवल 16 प्रतिशत रहती है। देश की लगभग 60 प्रतिशत खेती मानसूनी बारिश पर निर्भर करती है। धान, गन्ना और दाल जैसी फसलों को अधिक पानी की जरूरत होती है, ऐसे में कमजोर मानसून से उत्पादन घट सकता है और खाद्य पदार्थों की कीमतें बढ़ सकती हैं। कृषि भारत की GDP में लगभग 18 प्रतिशत योगदान देती है और देश की आधी आबादी इससे जुड़ी हुई है। ऐसे में कमजोर मानसून का असर सीधे अर्थव्यवस्था और ग्रामीण जीवन पर पड़ सकता है।

कई राज्यों में बढ़ेगा खतरा
विशेषज्ञों के अनुसार उत्तर-पश्चिम और मध्य भारत के कई राज्य सबसे अधिक जोखिम में हैं। राजस्थान, हरियाणा, पश्चिमी उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश में हीटवेव और सूखे की आशंका बढ़ गई है। अप्रैल में ही 11 राज्यों में हीटवेव अलर्ट जारी किया जा चुका है। उत्तर प्रदेश के बांदा में 25 अप्रैल को तापमान 47.4 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया था। मौसम वैज्ञानिकों ने “वॉर्म नाइट” और “सीवियर वॉर्म नाइट” जैसी स्थितियों को लेकर भी चेतावनी दी है, जहां रात का तापमान 30 डिग्री सेल्सियस से ऊपर रह सकता है। वहीं, पूर्वोत्तर भारत और असम में अनियमित मानसून की संभावना जताई गई है। हिमालय में बर्फबारी के बदलते पैटर्न से गंगा और यमुना जैसी नदियों के जल प्रवाह पर भी असर पड़ सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले महीनों में एशिया के कई देशों को जलवायु संकट का सामना करना पड़ सकता है।