बढ़ती पेट्रोल-डीजल कीमतों से डिलीवरी और कैब ड्राइवर परेशान

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एबी न्यूज़ नेटवर्क। देशभर में पेट्रोल और डीजल की बढ़ती कीमतों का असर अब ऐप आधारित डिलीवरी और कैब सेवाओं पर साफ दिखाई देने लगा है। गिग और प्लेटफॉर्म सर्विस वर्कर्स यूनियन (GIPSWU) ने शनिवार को देशव्यापी विरोध प्रदर्शन और हड़ताल का ऐलान किया है। यूनियन के अनुसार, दोपहर 12 बजे से शाम 5 बजे तक डिलीवरी बॉय और कैब ड्राइवर विभिन्न ऐप्स से लॉग ऑफ रहेंगे और शांतिपूर्ण प्रदर्शन करेंगे। स्विगी, जोमैटो, ब्लिंकिट, जेप्टो, ओला, उबर और रैपिडो जैसी कंपनियों से जुड़े लाखों कर्मचारी अपनी रोजी-रोटी के लिए बाइक और स्कूटर पर निर्भर हैं। ऐसे में ईंधन की लगातार बढ़ती कीमतों ने उनकी कमाई पर सीधा असर डाला है। यूनियन का कहना है कि कंपनियां डिलीवरी शुल्क या प्रति किलोमीटर भुगतान में बढ़ोतरी नहीं कर रही हैं, जबकि कर्मचारियों का खर्च लगातार बढ़ रहा है।
प्रति किलोमीटर 20 रुपये तय करने की मांग
यूनियन ने मांग की है कि गिग वर्कर्स के लिए न्यूनतम सेवा दर 20 रुपये प्रति किलोमीटर तय की जाए। GIPSWU की अध्यक्ष सीमा सिंह ने कहा कि भीषण गर्मी में लंबे समय तक काम करने वाले डिलीवरी कर्मचारी पहले से ही भारी दबाव में हैं और अब ईंधन कीमतों में बढ़ोतरी ने उनकी मुश्किलें और बढ़ा दी हैं। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि कंपनियां भुगतान बढ़ाने पर फैसला नहीं लेतीं, तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा। यूनियन के राष्ट्रीय समन्वयक निर्मल गोराना के अनुसार, देश में करीब 1 करोड़ 20 लाख गिग और प्लेटफॉर्म वर्कर्स कार्यरत हैं, जिनमें फूड डिलीवरी, ग्रोसरी डिलीवरी, लॉजिस्टिक्स और कैब सेवाओं से जुड़े कर्मचारी शामिल हैं। इन सभी को पेट्रोल, वाहन सर्विसिंग और अन्य परिचालन खर्च खुद उठाने पड़ते हैं।
सरकार से हस्तक्षेप की मांग
यूनियन ने केंद्र और राज्य सरकारों से भी हस्तक्षेप करने की अपील की है। उनका कहना है कि सरकार को ऐप आधारित कंपनियों के लिए ऐसे दिशा-निर्देश जारी करने चाहिए, जिससे बढ़ती ईंधन कीमतों का पूरा बोझ कर्मचारियों पर न पड़े। यूनियन ने स्पष्ट किया कि शनिवार का प्रदर्शन पूरी तरह शांतिपूर्ण रहेगा और इसका उद्देश्य सरकार तथा कंपनियों का ध्यान गिग वर्कर्स की आर्थिक परेशानियों की ओर आकर्षित करना है। लगातार बढ़ती महंगाई और कम होती आय के बीच गिग वर्कर्स अब अपने अधिकारों और बेहतर भुगतान की मांग को लेकर खुलकर सामने आने लगे हैं।