बिना बिजली चमकेगी सड़क, हादसे रोकने की एक कोशिश

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शेगांव। महाराष्ट्र के शेगांव के दो युवा नवप्रवर्तकों राजवर्धन ठाकुर और अथर्व देशमुख ने रात के समय सड़क सुरक्षा बढ़ाने के उद्देश्य से एक विशेष ग्लो-आधारित रोड विजिबिलिटी तकनीक विकसित की है। “बायो-बेस्ड सेल्फ-हीलिंग एंड नाइट विजिबिलिटी रोड टेक्नोलॉजी” नामक इस परियोजना का उद्देश्य अंधेरे में सड़क पर कम दृश्यता के कारण होने वाले हादसों को कम करना है। छात्रों ने एक विशेष चमकदार कोटिंग तैयार की है, जो दिन में प्रकाश को अवशोषित कर रात में चमकती है। इससे वाहन चालकों को सड़क के किनारे, डिवाइडर, मोड़ और लेन स्पष्ट रूप से दिखाई दे सकेंगी। खास बात यह है कि यह तकनीक बिना बिजली के काम करती है और कम लागत में तैयार की गई है।
ऑस्ट्रेलियाई स्मार्ट रोड तकनीक से प्रेरित, भारतीय सड़कों के अनुसार किया बदलाव
राजवर्धन और अथर्व के अनुसार, यह विचार उन्हें रात में खराब दिखाई देने वाली सड़कों, मिट चुके रोड मार्किंग्स और लगातार हो रहे सड़क हादसों को देखकर आया। उन्होंने पाया कि सामान्य थर्मोप्लास्टिक रोड मार्किंग समय के साथ बारिश, धूल, टायरों के घर्षण और मौसम के प्रभाव से फीकी पड़ जाती है। इसके बाद दोनों ने अधिक टिकाऊ और लंबे समय तक चमकने वाली रोड मार्किंग प्रणाली विकसित करने पर शोध शुरू किया। यह तकनीक ऑस्ट्रेलिया की स्मार्ट रोड अवधारणाओं से प्रेरित है, लेकिन इसे भारतीय सड़क परिस्थितियों और कम लागत को ध्यान में रखते हुए संशोधित किया गया है। इस परियोजना को विकसित करने में लगभग 7,500 रुपये की लागत आई। इसमें स्ट्रॉन्शियम एल्युमिनेट ग्लो पाउडर, एक्रेलिक व ऑयल बेस्ड रोड पेंट, वाटरप्रूफ कोटिंग और रिफ्लेक्टिव पिगमेंट जैसे पदार्थों का उपयोग किया गया है।
सेल्फ-हीलिंग सीमेंट पर भी शोध
दोनों छात्रों ने लगभग एक वर्ष तक प्रतिदिन पढ़ाई के साथ दो घंटे इस परियोजना पर काम किया और कई असफल परीक्षणों के बाद सफलता हासिल की। उन्होंने संत गजानन महाराज मंदिर और शेगांव रेलवे स्टेशन के आसपास छोटे स्तर पर इसका प्रदर्शन भी किया, जिसे स्थानीय लोगों से सकारात्मक प्रतिक्रिया मिली। इस परियोजना को विभिन्न तकनीकी प्रतियोगिताओं और रिसर्च पेपर प्रस्तुतियों में भी सम्मान प्राप्त हुआ है। इसके अलावा छात्र “बायो-बेस्ड सेल्फ-हीलिंग सीमेंट” पर भी शोध कर रहे हैं, जो सड़क में बनने वाली छोटी दरारों को स्वतः भरने में सक्षम होगा। हालांकि यह तकनीक अभी प्रारंभिक परीक्षण चरण में है। राजवर्धन और अथर्व अपनी संस्था “रिल्वियन ग्रुप” के माध्यम से इस तकनीक को हाईवे, स्मार्ट सिटी, ग्रामीण सड़कों और दुर्घटना संभावित क्षेत्रों में लागू करने की दिशा में काम कर रहे हैं।