- भाषा कौशल की होगी सीधी जांच

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एबी न्यूज नेटवर्क। मुंबई और आसपास के क्षेत्रों में लगातार सामने आ रहे भाषा से जुड़े विवादों के बीच महाराष्ट्र सरकार ने मिरा-भायंदर में एक नया कदम उठाया है। इस पायलट प्रोजेक्ट के तहत अब ऑटो-रिक्शा और टैक्सी चालकों के लिए मराठी भाषा का ज्ञान अनिवार्य कर दिया गया है। मिरा रोड और भायंदर इलाके में चल रहे इस अभियान में अब तक 12,000 से अधिक चालकों के परमिट और दस्तावेजों की जांच की जा चुकी है। खास बात यह है कि पहली बार चालकों की भाषा दक्षता को भी परखा जा रहा है, ताकि वे स्थानीय यात्रियों से बेहतर संवाद कर सकें।
सर्टिफिकेट नहीं, अब व्यवहारिक परीक्षानई व्यवस्था के तहत चालकों को एक बेसिक टेस्ट पास करना होगा, जिसमें मराठी में छोटा पैराग्राफ लिखना और मौखिक परीक्षा देना शामिल है। पहले भाषा ज्ञान के लिए केवल प्रमाणपत्र पर्याप्त माना जाता था, लेकिन अब सरकार ने इस प्रक्रिया को बदलते हुए व्यावहारिक दक्षता पर जोर दिया है। यह पहल उन शिकायतों के बाद शुरू की गई है, जिनमें लाइसेंस और परमिट जारी करने में अनियमितताओं की बात सामने आई थी।
पूरे राज्य में हो सकता है विस्तारमहाराष्ट्र मोटर व्हीकल नियमों के नियम 24 के अनुसार चालकों के लिए मराठी का ज्ञान अनिवार्य है, जिसे 2019 में और सख्त किया गया था। परिवहन मंत्री Pratap Sarnaik ने बताया कि यह पायलट प्रोजेक्ट जांच प्रक्रिया में खामियों को दूर करने के उद्देश्य से शुरू किया गया है। जो चालक इस परीक्षा में असफल होंगे, उनके परमिट निलंबित किए जा सकते हैं। यह अभियान 1 मई तक जारी रहेगा, जिसके बाद रिपोर्ट तैयार की जाएगी। सफल रहने पर इस नीति को पूरे महाराष्ट्र में लागू किया जा सकता है।