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मुंबई: देशभर के बैंकों की निगरानी करने वाला भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) समय-समय पर नियमों के उल्लंघन पर सख्त कार्रवाई करता रहा है। इसी क्रम में RBI ने महाराष्ट्र के एक सहकारी बैंक के खिलाफ बड़ी कार्रवाई करते हुए उसका लाइसेंस रद्द कर दिया है, जबकि एक अन्य बैंक पर आर्थिक दंड लगाया गया है। RBI की यह कार्रवाई बैंकिंग नियमन अधिनियम और जारी दिशानिर्देशों के पालन को सुनिश्चित करने के उद्देश्य से की गई है। इससे स्पष्ट संकेत मिलता है कि नियमों की अनदेखी करने वाले वित्तीय संस्थानों पर सख्ती जारी रहेगी।
इस बैंक का लाइसेंस हुआ रद्द
RBI ने 2 अप्रैल के आदेश के तहत ‘शिरपुर मर्चेंट्स को-ऑपरेटिव बैंक लिमिटेड, शिरपुर’ का लाइसेंस रद्द कर दिया है। बैंकिंग रेगुलेशन एक्ट, 1949 की धारा 22 और 56 के तहत यह कार्रवाई की गई। RBI ने निर्देश दिया कि 6 अप्रैल 2026 के कारोबार समाप्त होने के बाद बैंक अपनी सभी बैंकिंग गतिविधियां बंद कर दे। इस संबंध में महाराष्ट्र के सहकार आयुक्त और सहकारी संस्थाओं के रजिस्ट्रार को भी सूचित कर दिया गया है। साथ ही बैंक के परिसमापन (लिक्विडेशन) की प्रक्रिया शुरू करने और लिक्विडेटर नियुक्त करने के आदेश भी जारी किए गए हैं।
कार्रवाई के पीछे क्या रही वजह
RBI के अनुसार, शिरपुर मर्चेंट्स को-ऑपरेटिव बैंक के पास पर्याप्त पूंजी नहीं थी और वह बैंकिंग नियमन अधिनियम के कई प्रावधानों का पालन करने में विफल रहा। केंद्रीय बैंक ने कहा कि इस बैंक को आगे संचालन की अनुमति देना जमाकर्ताओं के हित में नहीं होता, क्योंकि उसकी वित्तीय स्थिति इतनी मजबूत नहीं है कि वह सभी जमाकर्ताओं की राशि लौटा सके। इसी कारण बैंक को नए जमा स्वीकार करने और मौजूदा जमाकर्ताओं को भुगतान करने से भी रोक दिया गया है। हालांकि, राहत की बात यह है कि डिपॉजिट इंश्योरेंस एंड क्रेडिट गारंटी कॉर्पोरेशन (DICGC) के तहत 5 लाख रुपये तक की जमा राशि सुरक्षित रहेगी। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, 99.7 प्रतिशत जमाकर्ताओं को उनकी पूरी राशि वापस मिलने की संभावना है, और अब तक करीब 48.95 करोड़ रुपये का भुगतान किया जा चुका है।
इस बैंक पर लगा जुर्माना
वहीं, RBI ने ‘डॉ. पंजाबराव देशमुख अर्बन को-ऑपरेटिव बैंक लिमिटेड, अमरावती’ पर 1.09 लाख रुपये का जुर्माना लगाया है। यह कार्रवाई ग्राहकों से NEFT लेनदेन पर निर्धारित सीमा से अधिक शुल्क वसूलने और निवेश संबंधी नियमों का पालन न करने के कारण की गई। RBI ने स्पष्ट किया है कि यह दंड बैंकिंग प्रणाली में पारदर्शिता और अनुशासन बनाए रखने के लिए आवश्यक है। केंद्रीय बैंक की इस कार्रवाई से अन्य बैंकों को भी नियमों का कड़ाई से पालन करने का संदेश गया है।