अशोक खरात कॉल डेटा का खुलासा! रूपाली चाकणकर पर सवाल, 177 कॉल का दावा

    15-Apr-2026
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मुंबई। मुंबई में आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में सोशल एक्टिविस्ट अंजलि दमानिया ने नासिक के चर्चित अशोक खरात मामले में बड़ा खुलासा किया है। दमानिया ने दावा किया कि खरात के कई प्रभावशाली नेताओं और अधिकारियों से करीबी संबंध थे, जिसके सबूत के तौर पर उन्होंने मोबाइल कॉल डेटा की एक विस्तृत सूची पेश की। इस खुलासे के बाद महाराष्ट्र की राजनीति में हलचल तेज हो गई है। दमानिया के अनुसार, यह मामला केवल एक व्यक्ति तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके तार सत्ता और प्रशासन के कई स्तरों तक जुड़े हुए हैं।

22 मिनट तक लंबी बातचीत
दमानिया ने विशेष रूप से रूपाली चाकणकर का नाम लेते हुए कहा कि उन्होंने अशोक खरात को कुल 177 बार फोन किया। इतना ही नहीं, एक दिन में दोनों के बीच 22 मिनट तक लंबी बातचीत भी हुई। दमानिया का कहना है कि इतने अधिक संपर्क को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता और इस आधार पर चाकणकर से पूछताछ होनी चाहिए। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि घटना के एक महीने बाद भी जांच एजेंसियों ने उन्हें पूछताछ के लिए नहीं बुलाया, जो गंभीर सवाल खड़े करता है। दमानिया ने स्पष्ट किया कि वह इस मामले में SIT से औपचारिक रूप से पूछताछ की मांग करेंगी।

कई बड़े नेताओं और अधिकारियों के नाम उजागर
प्रेस कॉन्फ्रेंस में जारी सूची में कई प्रमुख राजनीतिक और प्रशासनिक हस्तियों के नाम शामिल हैं। इनमें जयंत पाटिल, एकनाथ शिंदे, सुनील तटकरे, नितिन पवार और चंद्रकांत पाटिल जैसे नाम सामने आए हैं। इसके अलावा पद्मश्री पोपटराव पवार, उदय सांगले, प्रभाकर काले और अन्य सहयोगियों के नाम भी इस सूची में शामिल बताए गए हैं। दमानिया ने कहा कि इन नामों के सामने आने से यह स्पष्ट होता है कि खरात का नेटवर्क कितना व्यापक और प्रभावशाली था।

सरकारी अफसर भी संपर्क में, जांच की मांग तेज
दमानिया ने यह भी खुलासा किया कि कई सरकारी अधिकारी भी अशोक खरात के संपर्क में थे। इनमें दीपक लोंढे, बालासाहेब बोराडे, नंदकिशोर कटोरे (डॉक्टर), सचिन चुंबाले, मंगेश नवले, राहुल देशमुख, अविनाश पोटे, कमलाकर पोटे और महेंद्र शेलके-पाटिल जैसे नाम शामिल हैं। इसके अलावा तहसीलदार, कलेक्टर और पुलिस विभाग के कई अधिकारी भी कथित तौर पर संपर्क में थे। इन खुलासों के बाद मामले की निष्पक्ष जांच की मांग तेज हो गई है। दमानिया ने कहा कि अगर इस मामले की गहराई से जांच हुई, तो कई बड़े खुलासे सामने आ सकते हैं, जो राज्य की राजनीति और प्रशासन को प्रभावित करेंगे।