- अंतरराष्ट्रीय ट्रांसजेंडर दृश्यता दिवस पर प्रदर्शन
एबी न्यूज़ नेटवर्क। देहरादून में 31 मार्च को मनाए जाने वाले इंटरनेशनल ट्रांसजेंडर डे ऑफ विजिबलिटी के अवसर पर इस वर्ष उत्सव की जगह विरोध का माहौल देखने को मिला। ट्रांसजेंडर समुदाय और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने शहर में एकजुट होकर Transgender Amendment Bill, 2026 के खिलाफ प्रदर्शन किया। यह बिल हाल ही में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू की मंजूरी के बाद कानून बना है। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि यह बिल बिना पर्याप्त परामर्श के लाया गया है और इसमें ऐसे प्रावधान शामिल हैं जो ट्रांसजेंडर, नॉन-बाइनरी और LGBTQ+ समुदाय के अधिकारों को प्रभावित कर सकते हैं। देशभर में इसी मुद्दे को लेकर विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं।
काले कपड़ों में विरोध, अधिकारों के हनन का आरोपप्रदर्शन में शामिल लोगों ने काले कपड़े पहनकर सरकार के फैसले के प्रति असंतोष जताया। उनका कहना था कि यह दिन, जो पहचान और अधिकारों के सम्मान के लिए समर्पित होता है, इस बार अधिकारों के उल्लंघन का प्रतीक बन गया है। ट्रांस अधिकार कार्यकर्ता ओशिन सरकार ने कहा कि LGBTQ+ और नॉन-बाइनरी व्यक्ति समाज के समान सदस्य हैं और किसी भी तरह की बाध्यकारी प्रक्रिया, जैसे मेडिकल जांच, उनके आत्म-पहचान और निजता के अधिकार का उल्लंघन है। प्रदर्शनकारियों ने यह भी आरोप लगाया कि नया कानून समुदाय की स्वतंत्रता को सीमित करने का प्रयास करता है।
सुप्रीम कोर्ट के फैसले के खिलाफ बताया गया बिलसमुदाय के सदस्यों ने इस बिल को NALSA v Union of India के फैसले के खिलाफ बताया। इस ऐतिहासिक फैसले में सुप्रीम कोर्ट ने ट्रांसजेंडर व्यक्तियों को “तीसरे लिंग” के रूप में मान्यता दी थी और उनके मौलिक अधिकारों की रक्षा की बात कही थी। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि नया संशोधन बिल इस निर्णय की भावना के विपरीत है और इससे अब तक हुए सामाजिक सुधारों पर असर पड़ सकता है। उन्होंने कहा कि 2014 के बाद समाज में जो स्वीकार्यता बढ़ी है, यह बिल उसे कमजोर कर सकता है।
रैली, बिल की प्रतियां जलाईंप्रदर्शन के दौरान गांधी पार्क से परेड ग्राउंड तक रैली निकाली गई, जहां प्रदर्शनकारियों ने बिल की प्रतियां जलाकर अपना विरोध दर्ज कराया। उन्होंने सरकार से मांग की कि वह शिक्षा, रोजगार, स्वास्थ्य सेवाओं और सामाजिक सुरक्षा जैसे मुद्दों पर ध्यान दे, बजाय इसके कि ऐसे कानून लाए जाएं जो समुदाय को पीछे धकेलें। प्रदर्शनकारियों ने नारेबाजी करते हुए कहा कि उनका आंदोलन आगे भी जारी रहेगा। साथ ही, 6 अप्रैल को दिल्ली में एक बड़े राष्ट्रीय स्तर के विरोध प्रदर्शन की योजना बनाई गई है, जिसमें देशभर से ट्रांसजेंडर समुदाय के लोग शामिल होंगे।