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नागपुर। दत्ता मेघे, महाराष्ट्र के वरिष्ठ नेता और पूर्व सांसद का रविवार को 89 वर्ष की आयु में हृदयाघात से निधन हो गया। उनके पुत्र और विधायक समीर मेघे ने इस खबर की पुष्टि की। विदर्भ सहित पूरे राज्य में उनके निधन से शोक की लहर है। लंबे समय तक राजनीति में सक्रिय रहे मेघे का व्यक्तित्व सरल और जनसेवा के प्रति समर्पित रहा। उनके निधन को क्षेत्र के राजनीतिक और सामाजिक जीवन के लिए एक बड़ी क्षति माना जा रहा है।
राजनीतिक सफर और जनसेवा की पहचान
1936 में वर्धा जिले में जन्मे दत्ता मेघे का राजनीतिक जीवन कई दशकों तक फैला रहा। उन्होंने लोकसभा में वर्धा का प्रतिनिधित्व करते हुए चार बार सांसद के रूप में कार्य किया। इसके अलावा वे 2002 से 2008 तक राज्य सभा के सदस्य भी रहे। अपने लंबे करियर में उन्होंने इंडियन नेशनल कांग्रेस, नेशनलिस्ट कांग्रेस पार्टी और भारतीय जनता पार्टी जैसे प्रमुख दलों के साथ काम किया। साथ ही वे महाराष्ट्र विधान परिषद के भी कई बार सदस्य रहे। उनकी पहचान एक प्रभावशाली और अनुभवी नेता के रूप में थी, जिन्होंने हमेशा क्षेत्रीय विकास और जनहित के मुद्दों को प्राथमिकता दी।
शिक्षा और स्वास्थ्य क्षेत्र में अमिट योगदान
राजनीति के अलावा दत्ता मेघे शिक्षा और स्वास्थ्य क्षेत्र में अपने उल्लेखनीय योगदान के लिए भी जाने जाते थे। उन्होंने अपने नाम से कई शैक्षणिक संस्थानों, मेडिकल कॉलेजों, इंजीनियरिंग कॉलेजों और अस्पतालों की स्थापना की, जिससे खासकर ग्रामीण क्षेत्रों में शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच बढ़ी। उनके द्वारा स्थापित संस्थानों ने हजारों छात्रों और मरीजों को लाभ पहुंचाया। उनके निधन के साथ ही विदर्भ ने एक ऐसे दूरदर्शी नेता को खो दिया, जिन्होंने न केवल राजनीति में बल्कि समाज निर्माण में भी अहम भूमिका निभाई।