छात्रों के मानसिक स्वास्थ्य और फिटनेस पर जोर: यूजीसी ने विश्वविद्यालयों के लिए जारी किए नए दिशा-निर्देश

    16-Mar-2026
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- कैंपस में समग्र विकास को प्राथमिकता देने का निर्देश
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एबी न्यूज़ नेटवर्क। देश के उच्च शिक्षा नियामक University Grants Commission (यूजीसी) ने विश्वविद्यालयों और कॉलेजों को निर्देश दिया है कि वे कैंपस में छात्रों के मानसिक स्वास्थ्य, शारीरिक फिटनेस और भावनात्मक कल्याण को प्राथमिकता दें। यूजीसी ने इस संबंध में व्यापक दिशा-निर्देश जारी करते हुए कहा है कि उच्च शिक्षण संस्थानों में ऐसा वातावरण बनाया जाना चाहिए, जहां छात्र सुरक्षित, सहयोगी और सकारात्मक माहौल में पढ़ाई कर सकें। इन दिशानिर्देशों का उद्देश्य देश के सभी उच्च शिक्षण संस्थानों में एक ऐसा शैक्षणिक वातावरण तैयार करना है, जो छात्रों के समग्र विकास को बढ़ावा दे। यूजीसी का मानना है कि आज के प्रतिस्पर्धी दौर में छात्रों को केवल अकादमिक शिक्षा ही नहीं, बल्कि मानसिक और शारीरिक रूप से भी मजबूत बनाना जरूरी है।

राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के अनुरूप पहल

यूजीसी द्वारा जारी यह नया ढांचा National Education Policy 2020 के उद्देश्यों के अनुरूप तैयार किया गया है। इस नीति में छात्रों के समग्र विकास, मानसिक संतुलन और बेहतर समर्थन तंत्र को मजबूत करने पर विशेष जोर दिया गया है। यूजीसी ने कहा कि विश्वविद्यालयों और कॉलेजों को ऐसे तंत्र विकसित करने होंगे, जो छात्रों को शैक्षणिक दबाव, साथियों के प्रभाव, व्यवहार संबंधी चुनौतियों, तनाव और करियर से जुड़ी चिंताओं से निपटने में मदद कर सकें। संस्थानों को यह भी सुनिश्चित करना होगा कि कैंपस में प्रवेश व्यवस्था, छात्रावास, पुस्तकालय, कैफेटेरिया, खेल मैदान और अन्य गतिविधि क्षेत्रों में पर्याप्त सुरक्षा व्यवस्था हो, ताकि छात्रों को किसी भी प्रकार के शारीरिक, सामाजिक या सांस्कृतिक खतरे से बचाया जा सके।

स्टूडेंट सर्विस सेंटर स्थापित करने की सिफारिश

यूजीसी के दिशा-निर्देशों में हर उच्च शिक्षण संस्थान में “स्टूडेंट सर्विस सेंटर” (SSC) स्थापित करने की सिफारिश की गई है। यह केंद्र उन छात्रों के लिए विशेष सहायता केंद्र के रूप में काम करेंगे, जो भावनात्मक तनाव, मानसिक दबाव या पढ़ाई से जुड़ी समस्याओं का सामना कर रहे हैं। इन केंद्रों में प्रशिक्षित काउंसलर और मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञ उपलब्ध होंगे, जो छात्रों को व्यक्तिगत परामर्श, ऑनलाइन कंसल्टेशन, समूह चर्चा और हेल्पलाइन के माध्यम से सहायता प्रदान करेंगे। इसके साथ ही ऐसे छात्रों का रिकॉर्ड भी रखा जाएगा जो अधिक तनाव या मानसिक दबाव की स्थिति में हो सकते हैं, ताकि समय रहते उन्हें जरूरी मदद दी जा सके। विशेषज्ञों का मानना है कि इससे छात्रों के बीच तनाव कम होगा और पढ़ाई बीच में छोड़ने की घटनाओं में भी कमी आ सकती है।

शारीरिक गतिविधियों और खेलों को बढ़ावा देने पर जोर
यूजीसी ने छात्रों के मानसिक स्वास्थ्य को बेहतर बनाने के लिए शारीरिक गतिविधियों को भी महत्वपूर्ण बताया है। दिशा-निर्देशों में विश्वविद्यालयों को खेल, व्यायाम, योग और अन्य फिटनेस गतिविधियों को बढ़ावा देने के लिए प्रोत्साहित किया गया है। इसके लिए संस्थानों को खेल परिषद, जिम्नेजियम और खेल सुविधाओं को मजबूत करने की सलाह दी गई है। साथ ही एनसीसी और एनएसएस जैसे मंचों के माध्यम से छात्रों को सक्रिय भागीदारी के लिए प्रेरित करने की भी सिफारिश की गई है। यूजीसी ने कहा है कि छात्रों को रोजाना कम से कम एक घंटे की शारीरिक गतिविधि में भाग लेना चाहिए, जिससे उनका शारीरिक स्वास्थ्य बेहतर होने के साथ-साथ मानसिक संतुलन भी बना रहेगा।

सकारात्मक और सक्रिय कैंपस संस्कृति पर फोकस
दिशा-निर्देशों में विश्वविद्यालयों को एक सकारात्मक और सक्रिय कैंपस संस्कृति विकसित करने के लिए भी कहा गया है। इसमें सांस्कृतिक कार्यक्रम, इंटर्नशिप, सामुदायिक गतिविधियां और विभिन्न रचनात्मक मंचों को बढ़ावा देने की बात कही गई है, ताकि छात्र अपनी रुचियों को पहचान सकें और आत्मविश्वास विकसित कर सकें। यूजीसी ने यह भी सुझाव दिया है कि विश्वविद्यालय मानसिक स्वास्थ्य से जुड़े प्रमुख संस्थानों के साथ सहयोग करें और शिक्षकों के लिए काउंसलिंग प्रशिक्षण तथा जागरूकता कार्यक्रम आयोजित करें। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि इन दिशा-निर्देशों को प्रभावी ढंग से लागू किया गया, तो भारतीय विश्वविद्यालयों में छात्रों के लिए अधिक सुरक्षित, संतुलित और प्रेरणादायक शैक्षणिक माहौल तैयार किया जा सकेगा।