- एलपीजी सिलेंडर की कमी से बढ़ी मुश्किलें
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एबी न्यूज नेटवर्क। पुणे में घरेलू एलपीजी सिलेंडर की उपलब्धता में आ रही दिक्कतों के कारण शहर के कई इलाकों में कोयला और जलावन लकड़ी की मांग अचानक बढ़ गई है। स्थिति ऐसी बन गई है कि घरों के साथ-साथ छोटे होटल, ढाबे और फूड बिजनेस भी खाना पकाने के लिए वैकल्पिक ईंधन की तलाश में जुट गए हैं। ईंधन सप्लायर्स और उद्योग से जुड़े लोगों का कहना है कि पिछले कुछ हफ्तों में कोयले की मांग में तेज उछाल देखने को मिला है। इस बढ़ती मांग के चलते स्थानीय बाजार में कोयले और लकड़ी की कीमतों में भी बढ़ोतरी होने लगी है। साथ ही बाजार में जमाखोरी और कालाबाजारी की शिकायत भी सामने आने लगी हैं, जिससे आम लोगों और छोटे कारोबारियों की परेशानी और बढ़ गई है।
कोयले की मांग में करीब 80 प्रतिशत की बढ़ोतरी
शहर के कोयला सप्लायर प्रेम पवार के अनुसार, एलपीजी सिलेंडर नहीं मिलने के कारण कोयले की मांग में करीब 80 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। उनका कहना है कि कई हाउसिंग सोसायटी के निवासी एक बार में 5 से 10 किलो तक कोयला खरीद रहे हैं क्योंकि उन्हें समय पर गैस सिलेंडर नहीं मिल पा रहा है। कुछ लोग अपने घर की बालकनी में कोयले के चूल्हे पर खाना बना रहे हैं, क्योंकि उनके पास बैकअप सिलेंडर भी उपलब्ध नहीं है। बढ़ती मांग का असर बाजार पर साफ दिखाई दे रहा है और कोयले की कीमतें तेजी से बढ़ने लगी हैं। कई दुकानदारों का कहना है कि अचानक बढ़ी मांग के कारण सप्लाई चेन पर भी दबाव बढ़ गया है।
पारंपरिक तरीके से खाना बनाने को मजबूर परिवार
एलपीजी की कमी ने कई परिवारों को पारंपरिक खाना पकाने के तरीकों की ओर लौटने के लिए मजबूर कर दिया है। पुणे के नरहे इलाके में रहने वाली छाया भावर ने बताया कि उनके परिवार में आठ सदस्य हैं और उन्हें गैस सिलेंडर नहीं मिल पाने के कारण कोयले का चूल्हा खरीदना पड़ा। उन्होंने सतारा से चूल्हा मंगवाया और उसके बाद कोयला व जलावन लकड़ी खरीदकर बालकनी में खाना बनाना शुरू किया। भावर ने बताया कि यह विचार उन्हें अपने गांव से आया, जहां लोग आज भी कोयले के चूल्हे का इस्तेमाल करते हैं। शहर के कई इलाकों में ऐसी ही स्थिति देखने को मिल रही है, जहां लोग मजबूरी में पुराने तरीकों से खाना पकाने लगे हैं।
रेस्टोरेंट और फूड इंडस्ट्री पर भी असर
एलपीजी की कमी का असर केवल घरों तक सीमित नहीं है बल्कि शहर के रेस्टोरेंट और स्नैक निर्माण उद्योग भी इससे प्रभावित हो रहे हैं। कई छोटे होटल और फूड बिज़नेस अब कोयला या डीजल जैसे विकल्पों का सहारा ले रहे हैं। पुणे के प्रसिद्ध स्नैक ब्रांड ‘बुधानी वेफर्स’ के मालिक अरविंद बुधानी ने बताया कि कई फरसाण और स्नैक बनाने वाले कारोबारी अब उत्पादन जारी रखने के लिए कोयला या डीजल का इस्तेमाल कर रहे हैं। हालांकि छोटे व्यवसायों के लिए अचानक ईंधन बदलना आसान नहीं है, क्योंकि उनके उपकरण खास तौर पर एलपीजी के लिए बनाए गए होते हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि गैस सप्लाई की समस्या लंबे समय तक बनी रहती है, तो इसका असर शहर की अर्थव्यवस्था और पर्यावरण दोनों पर पड़ सकता है।