आपकी सरकार, आपका आंदोलन?’ भाजपा की रैली के आह्वान पर सोशल मीडिया में छिड़ी बहस

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नागपुर। भाजपा विधायक प्रवीण दटके की एक फेसबुक पोस्ट ने शहर में प्रस्तावित रैली के आह्वान को लेकर सोशल मीडिया पर नई बहस छेड़ दी है। नागपुर मध्य विधानसभा क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करने वाले दटके ने मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के नेतृत्व में गुरुवार, 5 नवंबर को होने वाले मार्च में नागरिकों से शामिल होने की अपील की है। ‘लोकतंत्र बचाओ, अराजकता हटाओ’ नारे के साथ आयोजित यह रैली शाम 4 बजे यशवंत स्टेडियम से शुरू होकर जीरो माइल चौक पहुंचेगी। पोस्ट सामने आने के बाद फेसबुक पर कमेंट्स की बाढ़ आ गई। कई यूजर्स ने सवाल उठाया कि जब केंद्र और महाराष्ट्र, दोनों जगह भाजपा की सरकार है, तो फिर लोकतंत्र बचाने के लिए आंदोलन किसके खिलाफ किया जा रहा है? कुछ लोगों ने इसे सत्ताधारी पार्टी की ओर से विरोध प्रदर्शन किए जाने की विडंबना बताया। इस तरह रैली का निमंत्रण राजनीतिक मुद्दे के साथ-साथ सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बन गया है।
सत्ताधारी पार्टी के आंदोलन पर यूजर्स ने उठाए सवाल
पोस्ट पर प्रतिक्रिया देते हुए अमन लुटे ने इसे देखकर हंसी आने की बात कही और सवाल किया कि सत्ता में रहने वाली पार्टी आखिर किसके खिलाफ प्रदर्शन कर रही है। विनय बावने ने राज्य की कानून-व्यवस्था और मीडिया पर नियंत्रण जैसे मुद्दों को उठाते हुए सवाल किए। कुछ यूजर्स ने भाजपा को सुझाव दिया कि यदि उसे विरोध प्रदर्शन ही करना है, तो पहले विपक्ष में बैठकर आंदोलन करना चाहिए। वहीं, कुछ लोगों ने रैली के दौरान काले झंडे दिखाने की चेतावनी भी दी। इन प्रतिक्रियाओं से स्पष्ट हुआ कि सोशल मीडिया पर एक वर्ग इस मार्च के उद्देश्य और उसके राजनीतिक संदेश को लेकर असहज है। यूजर्स ने यह भी जानना चाहा कि जब सरकार स्वयं भाजपा के नेतृत्व में है, तो लोकतंत्र और व्यवस्था को लेकर विरोध का निशाना कौन है। इस तरह पोस्ट पर प्रतिक्रियाएं केवल रैली में शामिल होने या न होने तक सीमित नहीं रहीं, बल्कि सरकार की जवाबदेही और लोकतांत्रिक व्यवस्था पर भी सवाल उठने लगे।
रैली के समर्थन में भी आए कमेंट्स
हालांकि, सोशल मीडिया पर सभी प्रतिक्रियाएं आलोचनात्मक नहीं रहीं। उमेश बांदे ने रैली का समर्थन करते हुए कहा कि लोकतंत्र किसी एक राजनीतिक दल की संपत्ति नहीं है और सत्ताधारी पक्ष को भी संवैधानिक मुद्दों पर अपना पक्ष रखने तथा अपनी बात कहने का अधिकार है। उन्होंने यह भी कहा कि निर्वाचन आयोग जैसी संस्थाओं को लेकर उठने वाले सवालों का जवाब आरोप-प्रत्यारोप के बजाय तथ्यों और पारदर्शिता के साथ दिया जाना चाहिए। इस तरह सोशल मीडिया पर एक ओर रैली के औचित्य पर सवाल उठाए जा रहे हैं, तो दूसरी ओर इसे लोकतांत्रिक अभिव्यक्ति का अधिकार बताकर समर्थन भी मिल रहा है। अब सबकी नजर गुरुवार को होने वाली रैली पर है। इसमें कितने लोग शामिल होते हैं और भाजपा नेतृत्व ‘लोकतंत्र बचाओ, अराजकता हटाओ’ मार्च के पीछे का उद्देश्य किस तरह स्पष्ट करता है, यह देखना महत्वपूर्ण होगा।