प्लास्टिक कचरे से औद्योगिक फाइबर बनाने वाली मशीन का पेटेंट मिला

    04-Nov-2026
Total Views |
विदर्भ के दो शोधकर्ताओं डॉ. विजया संगावर और प्रो. गणेश येरावार को भारत सरकार ने दिया डिजाइन पेटेंट

Image Source:(Internet)

नागपुर।
प्लास्टिक कचरे की समस्या से निपटने के साथ ही उसे उपयोगी औद्योगिक सामग्री में बदलने की दिशा में विदर्भ के दो शोधकर्ताओं ने महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है। अमरावती की डॉ. विजया संगावर और आर्वी के प्रो. गणेश येरावार को ‘प्लास्टिक वेस्ट फाइबर मेकिंग मशीन’ के लिए भारत सरकार की ओर से आधिकारिक डिजाइन पेटेंट प्रदान किया गया है। डॉ. संगावर शासकीय विदर्भ विज्ञान एवं मानविकी संस्थान, अमरावती में भौतिकी विषय की प्राध्यापक हैं, जबकि प्रो. येरावार आर्ट्स, कॉमर्स एंड साइंस कॉलेज, आर्वी से जुड़े हैं। डॉ. संगावर के मार्गदर्शन में विकसित यह मशीन रोजमर्रा में इस्तेमाल होने वाले लगभग हर प्रकार के प्लास्टिक कचरे को फाइबर में बदलने में सक्षम है। इसकी खासियत यह है कि पूरी प्रक्रिया में किसी भी हानिकारक रसायन का उपयोग नहीं होता और प्रदूषण भी नहीं फैलता।

कम लागत में तैयार होगा औद्योगिक कच्चा माल
इस तकनीक में ऊर्जा और लागत की खपत भी कम होती है। मशीन से तैयार होने वाले उच्च गुणवत्ता के फाइबर का उपयोग विभिन्न उद्योगों में किया जा सकता है। इससे छोटे उद्यमियों, स्टार्टअप और विशेष रूप से टेक्सटाइल सेक्टर को कम कीमत पर कच्चा माल उपलब्ध कराने की संभावनाएं बढ़ेंगी। डॉ. संगावर का यह पांचवां, जबकि प्रो. येरावार का दूसरा पेटेंट है। इससे पहले डॉ. संगावर ने ऐसी पॉलीथिन फॉर्मूलेशन भी विकसित की है, जो 180 दिनों के भीतर विघटित होना शुरू हो जाती है और इसके लिए भी उन्हें पेटेंट मिल चुका है। उनका पहला पेटेंट वर्ष 2018 में मिला था। प्लास्टिक प्रदूषण कम करने और कचरे के पुनर्चक्रण को बढ़ावा देने वाली इस उपलब्धि पर क्षेत्र के शिक्षाविदों और पर्यावरणविदों ने दोनों शोधकर्ताओं को बधाई दी है।