मेयो अस्पताल में 3 हजार रुपए की वसूली को लेकर बवाल, 10 एंबुलेंस में तोड़फोड़

    04-Nov-2026
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- निजी एंबुलेंस संचालकों के बीच वर्चस्व की लड़ाई आई सामने
- तीन आरोपियों पर मामला दर्ज, एक हिरासत में

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नागपुर।
मेयो अस्पताल परिसर में निजी एंबुलेंस संचालन को लेकर चल रहा विवाद देर रात हिंसक रूप ले गया। कथित तौर पर 3 हजार रुपए की वसूली की मांग से शुरू हुए विवाद के बाद करीब 10 निजी एंबुलेंस में तोड़फोड़ की गई। इस घटना से अस्पताल परिसर में अफरा-तफरी मच गई। मामला निजी एंबुलेंस संचालकों के बीच वर्चस्व और कारोबार पर नियंत्रण को लेकर चल रही प्रतिस्पर्धा से जुड़ा बताया जा रहा है। तहसील पुलिस में दर्ज शिकायत के अनुसार, यशोधरा नगर के नूरी मस्जिद क्षेत्र निवासी एंबुलेंस चालक शेख रेहान शेख नूर (20) का परवेज फिरोज खान, सोनू उर्फ बाबा और सोहेब फिरोज खान के साथ विवाद हुआ था। रेहान का आरोप है कि तीनों ने अस्पताल परिसर में एंबुलेंस चलाने की अनुमति देने के बदले उससे 3 हजार रुपए मांगे थे। इस मांग का अन्य एंबुलेंस चालकों ने भी विरोध किया। इसी बात को लेकर दिन में कहासुनी हुई, जो कथित तौर पर मारपीट तक पहुंच गई। इसके बाद दोनों पक्षों के बीच तनाव बढ़ गया।

बेसबॉल बैट, हॉकी स्टिक और लोहे की रॉड से हमला

दिन में हुए विवाद के बाद देर रात आरोपी कथित तौर पर बेसबॉल बैट, हॉकी स्टिक और लोहे की रॉड लेकर अस्पताल परिसर पहुंचे। वहां खड़ी निजी एंबुलेंस को निशाना बनाते हुए वाहनों के कांच तोड़ दिए गए। करीब 10 एंबुलेंस को नुकसान पहुंचने की जानकारी सामने आई है। अचानक हुई इस तोड़फोड़ से परिसर में मौजूद लोगों में दहशत फैल गई। वारदात को अंजाम देने के बाद हमलावर मौके से फरार हो गए। पुलिस को आशंका है कि यह हमला दिन में हुए विवाद का बदला लेने के लिए किया गया। तहसील पुलिस ने शिकायत के आधार पर परवेज फिरोज खान, सोनू उर्फ बाबा और सोहेब फिरोज खान के खिलाफ मामला दर्ज किया है। इनमें से सोहेब फिरोज खान को हिरासत में लिया गया है, जबकि अन्य दो आरोपी फरार बताए जा रहे हैं। पुलिस के अनुसार, तीनों के खिलाफ पहले भी आपराधिक मामले दर्ज होने की जानकारी मिली है। फरार आरोपियों की तलाश के साथ ही हमले में प्रत्येक की भूमिका की जांच की जा रही है।

मरीजों को निजी अस्पतालों में शिफ्ट कराने के आरोपों की भी जांच
इस घटना के बाद मेयो अस्पताल परिसर में निजी एंबुलेंस संचालकों और कथित बिचौलियों की गतिविधियां भी जांच के दायरे में आ गई हैं। मेयो अस्पताल में विदर्भ और पड़ोसी राज्यों से बड़ी संख्या में मरीज आते हैं। आपात स्थिति में मरीजों को एक अस्पताल से दूसरे अस्पताल तक पहुंचाने के लिए निजी एंबुलेंस पर निर्भर रहना पड़ता है। ऐसे में आरोप सामने आए हैं कि कुछ एंबुलेंस संचालक और बिचौलिए मरीजों तथा उनके परिजनों से संपर्क कर उन्हें सरकारी अस्पताल से निजी अस्पतालों में शिफ्ट कराने के लिए प्रेरित करते हैं। मरीजों को अपने माध्यम से निजी अस्पतालों तक पहुंचाने और एंबुलेंस संचालन पर नियंत्रण को लेकर अलग-अलग समूहों में प्रतिस्पर्धा होने की आशंका भी जताई जा रही है। हालांकि, मरीजों को शिफ्ट कराने और कथित रैकेट से जुड़े आरोपों की अभी स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है। पुलिस पूरे मामले की जांच कर रही है। जांच में यह भी पता लगाया जाएगा कि एंबुलेंस संचालन के नाम पर वसूली की मांग के पीछे कौन लोग सक्रिय हैं और अस्पताल परिसर में उनका नेटवर्क किस तरह काम करता है।

अस्पताल की सुरक्षा और एंबुलेंस संचालन पर उठे सवाल
मेयो जैसे बड़े सरकारी अस्पताल परिसर में हथियारनुमा वस्तुएं लेकर पहुंचे लोगों द्वारा एक साथ कई वाहनों में तोड़फोड़ किए जाने से सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। सवाल यह भी है कि अस्पताल परिसर में निजी एंबुलेंस का संचालन किसकी निगरानी में होता है और क्या सभी वाहनों तथा संचालकों का अधिकृत पंजीकरण है। मरीजों और उनके परिजनों से संपर्क करने वाले अनधिकृत बिचौलियों पर नियंत्रण की व्यवस्था भी जांच का विषय है। अस्पताल में आने वाले मरीज पहले ही बीमारी, आर्थिक परेशानी और मानसिक तनाव से जूझते हैं। ऐसे में एंबुलेंस सेवाओं को लेकर वसूली, दबाव या व्यावसायिक विवाद उनकी परेशानी बढ़ा सकते हैं। पुलिस कथित वसूली, एंबुलेंस संचालकों के बीच रंजिश और तोड़फोड़ की पूरी कड़ी की जांच कर रही है। घटना ने अस्पताल परिसर में सुरक्षा मजबूत करने के साथ ही निजी एंबुलेंस संचालन के लिए स्पष्ट नियम और प्रभावी निगरानी व्यवस्था लागू करने की आवश्यकता को भी सामने ला दिया है।