कौन हैं नेहा बोरा? CEC ज्ञानेश कुमार के खिलाफ प्रदर्शन में सुर्खियों में आईं JNU रिसर्च स्कॉलर

    05-Oct-2026
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- AISA की राष्ट्रीय अध्यक्ष, JNU में थिएटर एंड परफॉर्मेंस स्टडीज में PhD कर रहीं
- 23 दिन की भूख हड़ताल से भी आई थीं चर्चा में

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नई दिल्ली।
मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर दिल्ली के जंतर-मंतर पर चल रहे विरोध प्रदर्शन में AISA की राष्ट्रीय अध्यक्ष नेहा बोरा इन दिनों चर्चा में हैं। प्रदर्शन के दौरान पुलिस के साथ कथित झड़प और उनके जोशीले भाषणों के वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहे हैं। नेहा बोरा इससे पहले भी छात्र आंदोलनों के कारण राष्ट्रीय स्तर पर सुर्खियों में आ चुकी हैं। NEET परीक्षा विवाद और पेपर लीक मामलों को लेकर उन्होंने जंतर-मंतर पर **23 दिनों तक भूख हड़ताल** की थी। उनकी सक्रियता के कारण कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने भी उनके साथ प्रेस कॉन्फ्रेंस की थी। इसके बाद सोशल मीडिया पर लोग उनके बारे में जानने में रुचि दिखा रहे हैं कि नेहा बोरा कौन हैं, उनकी शिक्षा और राजनीतिक-सामाजिक सक्रियता की शुरुआत कैसे हुई और जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU) में वे किस विषय पर शोध कर रही हैं।

JNU में थिएटर एंड परफॉर्मेंस स्टडीज में कर रहीं PhD
नेहा बोरा जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय के स्कूल ऑफ आर्ट्स एंड एस्थेटिक्स से थिएटर एंड परफॉर्मेंस स्टडीज में PhD कर रही हैं। उत्तराखंड के खटीमा की रहने वाली नेहा का परिवार सैन्य पृष्ठभूमि से जुड़ा है। उनके पिता भारतीय सेना में कार्यरत रहे हैं, जिसके कारण बचपन में उन्हें देश के अलग-अलग शहरों में रहने और पढ़ने का अवसर मिला। उन्होंने शुरुआती पढ़ाई पश्चिम बंगाल के सिलीगुड़ी स्थित दिल्ली पब्लिक स्कूल से की। इसके बाद उच्च शिक्षा के लिए दिल्ली पहुंचीं और दिल्ली विश्वविद्यालय के हिंदू कॉलेज से समाजशास्त्र में स्नातक की डिग्री हासिल की। आगे उन्होंने डॉ. बीआर अंबेडकर विश्वविद्यालय से मास्टर डिग्री पूरी की। शिक्षा के साथ-साथ सामाजिक और छात्र मुद्दों में उनकी सक्रियता लगातार बढ़ती गई और बाद में उन्होंने छात्र राजनीति में प्रवेश किया।

स्ट्रीट प्ले के जरिए उठाए सामाजिक मुद्दे

छात्र राजनीति में सक्रिय होने से पहले नेहा बोरा का जुड़ाव थिएटर से रहा है। कॉलेज के दिनों में उन्होंने ‘संगवारी’ नाम के थिएटर समूह के साथ काम किया। स्ट्रीट प्ले और थिएटर के माध्यम से उन्होंने जमीनी स्तर के सामाजिक मुद्दों को करीब से समझा। अभिनय और रंगमंच के अनुभव ने उन्हें सार्वजनिक मंच पर अपनी बात प्रभावी तरीके से रखने का आत्मविश्वास भी दिया। JNU पहुंचने के बाद वह वामपंथी छात्र संगठन ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (AISA) से जुड़ीं। संगठन में सक्रिय भूमिका निभाते हुए उन्होंने छात्र अधिकारों और शिक्षा से जुड़े मुद्दों पर आवाज उठाई। अपनी वैचारिक समझ और भाषण कौशल के चलते वह संगठन में तेजी से आगे बढ़ीं और बाद में AISA की राष्ट्रीय अध्यक्ष चुनी गईं।

फीस वृद्धि से महिला सुरक्षा तक कई मुद्दों पर सक्रिय
नेहा बोरा की छात्र राजनीति में सक्रियता केवल चुनावी या कैंपस मुद्दों तक सीमित नहीं रही है। वह शिक्षा के निजीकरण, फीस बढ़ोतरी, हॉस्टल से जुड़ी समस्याओं और महिला सुरक्षा जैसे मुद्दों को लेकर आवाज उठाती रही हैं। NEET परीक्षा विवाद और पेपर लीक मामलों के विरोध में उनकी 23 दिन की भूख हड़ताल ने उन्हें व्यापक पहचान दिलाई। अब CEC ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर जंतर-मंतर पर जारी प्रदर्शन में उनकी सक्रिय भूमिका ने उन्हें एक बार फिर राष्ट्रीय चर्चा के केंद्र में ला दिया है। प्रदर्शन के दौरान उनके भाषण और पुलिस के साथ कथित टकराव के वीडियो सोशल मीडिया पर साझा किए जा रहे हैं। इस बीच, नेहा बोरा की पहचान एक शोधार्थी, थिएटर कलाकार और छात्र नेता तीनों रूपों में सामने आई है। उनके समर्थक उन्हें छात्र और युवा मुद्दों की मुखर आवाज मानते हैं, जबकि उनके राजनीतिक रुख को लेकर अलग-अलग प्रतिक्रियाएं भी सामने आती रही हैं।