नागपुर की डॉ. श्रुति बनी Mrs. United Nations 2026, बढ़ाया भारत का गौरव

    16-Oct-2026
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Mrs United Nations Earth का भी ख़िताब जीता



नागपुर।
किसी महिला के सपनों की उड़ान उसकी जिम्मेदारियों से नहीं, बल्कि उसके आत्मविश्वास और संकल्प से तय होती है। परिवार, करियर और सामाजिक दायित्वों के बीच अपनी पहचान बनाने वाली महिलाएं न केवल अपने सपनों को साकार करती हैं, बल्कि दूसरों के लिए भी प्रेरणा बनती हैं। नागपुर की डॉ. श्रुति नीरज सवालाखे ने अपनी उपलब्धि से इसी सोच को मजबूत किया है। नई दिल्ली के रोहिणी स्थित क्राउन प्लाजा में आयोजित अंतरराष्ट्रीय सौंदर्य एवं व्यक्तित्व प्रतियोगिता Mrs. United Nations 2026 में उन्होंने विजेता का खिताब अपने नाम किया। इसके साथ ही उन्हें Mrs. United Nations Earth के प्रतिष्ठित टाइटल से भी सम्मानित किया गया। चिकित्सा, कॉस्मेटोलॉजी और हॉस्पिटल मैनेजमेंट के क्षेत्र में अपनी पहचान बना चुकीं डॉ. श्रुति की यह सफलता मेहनत, आत्मविश्वास और निरंतर आगे बढ़ने के संकल्प का उदाहरण है। उनकी उपलब्धि ने नागपुर के साथ देश का गौरव भी बढ़ाया है।

चिकित्सा से अंतरराष्ट्रीय मंच तक बनाई पहचान
प्रख्यात चिकित्सक डॉ. रवि चरडे की बेटी डॉ. श्रुति पेशे से डेंटल सर्जन और कॉस्मेटोलॉजिस्ट हैं। उन्होंने कॉस्मेटोलॉजी में दो फेलोशिप पूरी करने के साथ हॉस्पिटल मैनेजमेंट में एमबीए की डिग्री भी हासिल की है। वर्तमान में वे नागपुर स्थित जय इंस्टीट्यूट और भानुकृपा हॉस्पिटल में निदेशक की जिम्मेदारियां संभाल रही हैं। व्यस्त पेशेवर जीवन के बावजूद उन्होंने अपनी व्यक्तिगत आकांक्षाओं को प्राथमिकता दी और अंतरराष्ट्रीय मंच पर अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन किया। मिसेज इंडिया में उपलब्धि हासिल करने के बाद अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मिली यह सफलता उनके लिए एक महत्वपूर्ण पड़ाव है। उनकी यात्रा बताती है कि निरंतर सीखने और स्वयं को बेहतर बनाने की इच्छा के साथ महिलाएं विभिन्न क्षेत्रों में अपनी अलग पहचान बना सकती हैं।


परिवार, करियर और सपनों के बीच संतुलन

डॉ. श्रुति राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय शतरंज चैंपियन जय सवालाखे की मां हैं। उनके पति प्रख्यात गैस्ट्रोएंटेरोलॉजिस्ट डॉ. नीरज सवालाखे और परिवार का सहयोग उनकी यात्रा का अहम हिस्सा रहा है। उनका मानना है कि परिवार की जिम्मेदारियां और व्यक्तिगत सपने एक-दूसरे के विरोधी नहीं हैं। सही योजना, अनुशासन, समर्पण और आत्मविश्वास के साथ महिलाएं दोनों भूमिकाओं को बखूबी निभा सकती हैं। उनके अनुसार, संतुलन का अर्थ प्रत्येक जिम्मेदारी को समान समय देना नहीं, बल्कि हर भूमिका को उसकी आवश्यकता के अनुसार पूरी ईमानदारी से निभाना है। परिवार का सहयोग और स्वयं पर विश्वास महिलाओं को आगे बढ़ने का हौसला देते हैं।

देशभक्ति के साथ इंसानियत को दिया महत्व
प्रतियोगिता में भारत का प्रतिनिधित्व करते हुए डॉ. श्रुति ने ऑपरेशन सिंदूर और तिरंगे से प्रेरित देशभक्ति की थीम के माध्यम से साहस, देशप्रेम और भारतीय पहचान का संदेश दिया। इस दौरान एक विदेशी प्रतिभागी की तबीयत खराब होने पर उन्होंने चिकित्सक होने के नाते उसकी सहायता भी की। उनके लिए यह अनुभव इस बात का उदाहरण है कि उपलब्धि केवल पुरस्कार और सम्मान तक सीमित नहीं होती, बल्कि जरूरत के समय दूसरों के काम आना भी महत्वपूर्ण है। भविष्य में वे अपनी चिकित्सा विशेषज्ञता और नेतृत्व क्षमता के माध्यम से महिला स्वास्थ्य जागरूकता, आत्मनिर्भरता और सशक्तिकरण के लिए योगदान देना चाहती हैं। उनका संदेश है कि महिलाएं उम्र, परिस्थितियों और पारिवारिक जिम्मेदारियों को अपनी क्षमताओं की सीमा न बनने दें। उनके लिए ताज सफलता का प्रतीक होने के साथ समाज में सकारात्मक बदलाव लाने की जिम्मेदारी भी है।