नवरात्रि के नौ दिनों में मां दुर्गा को चढ़ाएं नौ प्रकार के भोग

    12-Oct-2026
Total Views |
- घी से लेकर तिल तक, हर दिन के भोग का है विशेष धार्मिक महत्व

Image Source:(Internet)

नागपुर।
शारदीय नवरात्रि का पर्व मां दुर्गा के नौ स्वरूपों की आराधना के लिए विशेष महत्व रखता है। इन नौ दिनों में भक्त विधि-विधान से पूजा-अर्चना कर सुख, समृद्धि, आरोग्य और खुशहाली की कामना करते हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, नवरात्रि के प्रत्येक दिन देवी के अलग-अलग स्वरूप की पूजा की जाती है और उन्हें प्रिय भोग अर्पित किया जाता है। मान्यता है कि श्रद्धापूर्वक भोग लगाने से देवी की कृपा प्राप्त होती है। वर्ष 2026 में शारदीय नवरात्रि की शुरुआत 11 अक्टूबर से हुई है, जबकि 20 अक्टूबर को विजयादशमी यानी दशहरा मनाया जाएगा। नवरात्रि के दौरान घटस्थापना से लेकर कन्या पूजन तक विभिन्न धार्मिक अनुष्ठान किए जाते हैं।

नौ दिनों में देवी के नौ स्वरूपों की पूजा
हिंदू धर्म में सालभर में चैत्र, आषाढ़, माघ और शारदीय, इस प्रकार चार नवरात्रि मनाई जाती हैं। इनमें चैत्र और शारदीय नवरात्रि का विशेष महत्व है, जबकि आषाढ़ और माघ की नवरात्रि को गुप्त नवरात्रि कहा जाता है। ज्योतिषाचार्य नीतिका शर्मा के अनुसार, शारदीय नवरात्रि आश्विन मास के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि से प्रारंभ होती है। पहले दिन मां शैलपुत्री, दूसरे दिन मां ब्रह्मचारिणी, तीसरे दिन मां चंद्रघंटा, चौथे दिन मां कूष्मांडा, पांचवें दिन मां स्कंदमाता, छठे दिन मां कात्यायनी, सातवें दिन मां कालरात्रि, आठवें दिन मां महागौरी और नौवें दिन मां सिद्धिदात्री की पूजा की जाती है। प्रत्येक स्वरूप की आराधना का अपना धार्मिक महत्व माना गया है।

पहले पांच दिन चढ़ाएं घी, शक्कर, दूध, मालपुआ और केला

नवरात्रि के पहले दिन मां शैलपुत्री को शुद्ध देसी घी का भोग लगाया जाता है। मान्यता है कि इससे आरोग्य और सुख-समृद्धि का आशीर्वाद मिलता है। दूसरे दिन मां ब्रह्मचारिणी को शक्कर अर्पित की जाती है, जिसे दीर्घायु की कामना से जोड़ा जाता है। तीसरे दिन मां चंद्रघंटा को दूध और दूध से बनी मिठाइयों का भोग लगाया जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इससे जीवन के दुख और परेशानियां दूर होती हैं। चौथे दिन मां कूष्मांडा को मालपुआ अर्पित करना शुभ माना जाता है। इसे बुद्धि और निर्णय लेने की क्षमता से जोड़ा जाता है। पांचवें दिन मां स्कंदमाता को केले का भोग लगाया जाता है। मान्यता है कि इससे अच्छे स्वास्थ्य और कल्याण की कामना पूरी होती है।

अंतिम चार दिन शहद, गुड़, नारियल और तिल का भोग
छठे दिन मां कात्यायनी को शहद अर्पित किया जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इससे जीवन में तेज, आकर्षण और सकारात्मकता आती है। सातवें दिन मां कालरात्रि को गुड़ का भोग लगाया जाता है। इसे आकस्मिक संकटों और विपत्तियों से रक्षा की कामना से जोड़ा जाता है। आठवें दिन महाअष्टमी पर मां महागौरी की पूजा होती है। इस दिन नारियल अर्पित करना शुभ माना जाता है। कई परिवारों में कन्या पूजन कर बालिकाओं को भोजन भी कराया जाता है। नौवें दिन मां सिद्धिदात्री को तिल अर्पित किए जाते हैं। मान्यता है कि उनकी आराधना से भक्तों को सुरक्षा और कल्याण का आशीर्वाद मिलता है। ये सभी भोग धार्मिक परंपराओं और मान्यताओं पर आधारित हैं। भक्त अपनी श्रद्धा और सामर्थ्य के अनुसार देवी को भोग अर्पित कर सकते हैं।