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चंद्रपुर।
राज्य में नगर निगम चुनावों के दौरान लगभग 70 पार्षदों का निर्विरोध चुना जाना अब बड़ा राजनीतिक मुद्दा बन गया है। ठाणे, कल्याण-डोंबिवली और पनवेल सहित कई क्षेत्रों में बिना मुकाबले हुए चुनावों पर विपक्ष ने गंभीर सवाल उठाए हैं। शिवसेना (उद्धव) के सांसद संजय राउत (Sanjay Raut) ने तीखा हमला बोलते हुए कहा कि देश के इतिहास में इतने बड़े पैमाने पर निर्विरोध चुनाव पहले कभी देखने को नहीं मिले। उन्होंने अटल बिहारी वाजपेयी, वसंतदादा पाटिल, राम मनोहर लोहिया और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी तक का उदाहरण देते हुए कहा कि इतने बड़े नेता भी कभी निर्विरोध नहीं चुने गए। राउत ने आरोप लगाया कि महाराष्ट्र में ‘साम, दाम, दंड, भेद’ का प्रयोग कर विपक्षी उम्मीदवारों को चुनाव से पीछे हटने पर मजबूर किया जा रहा है।
बावनकुले का पलटवार
राउत के आरोपों पर राज्य के मंत्री और BJP नेता चंद्रशेखर बावनकुले ने कड़ा जवाब देते हुए कहा कि संजय राउत हमेशा नकारात्मकता फैलाते हैं। बावनकुले ने दावा किया कि चुनाव प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी रही और दोपहर 3 बजे तक चुनाव अधिकारियों के कार्यालय में आने वाले सभी उम्मीदवारों के आवेदन स्वीकार किए गए। उन्होंने कहा, “सिर्फ देवेंद्र फडणवीस की सरकार ही विकास कर सकती है इसी एजेंडे पर लोगों ने फॉर्म वापस लिए हैं, किसी पर कोई दबाव नहीं था।” बावनकुले के अनुसार, यह जनता का स्वेच्छिक विश्वास है, न कि किसी तरह की राजनीतिक जबरदस्ती का नतीजा।
70 निर्विरोध सीटों पर बढ़ी राजनीतिक गर्मी
राज्य में 70 निर्विरोध सीटों पर जीत ने राजनीतिक हलचल तेज कर दी है, क्योंकि इनमें से अधिकतम सीटें BJP के खाते में गई हैं। विपक्ष का आरोप है कि पैसे और दबाव का इस्तेमाल कर उम्मीदवारों को चुनाव से हटने पर मजबूर किया गया, वहीं MNS के एक उम्मीदवार द्वारा नाम वापस लेने से पार्टी कार्यकर्ताओं में भी असंतोष फैल गया। इस बीच, MNS प्रमुख राज ठाकरे ने संकेत दिया है कि वे अपनी आगामी बैठकों में इस पूरे मामले पर बड़ा खुलासा करेंगे। उधर, चुनाव आयोग ने भी इस घटनाक्रम का संज्ञान लिया है। बढ़ते सवालों के बीच अब यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या यह निर्विरोध चुनावों का नया पैटर्न बनने जा रहा है, या फिर विपक्ष के आरोप किसी बड़ी राजनीतिक हलचल का आधार तैयार करेंगे।