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नागपुर।
अजनी क्षेत्र में एक चौंकाने वाली घटना सामने आई है, जहां 12 वर्षीय son (12 year old )बच्चे को उसके ही माता–पिता ने महीनों तक जंजीरों से बांधकर कमरे में बंद रखा। रोज़ाना आठ से दस घंटे की यह कैद तब होती थी, जब माता–पिता दिहाड़ी मजदूरी पर काम करने के लिए घर से निकलते थे। बताया गया कि बच्चा अत्यधिक शरारती और उद्दंड था, और पड़ोसियों के साथ झगड़ा करता था। पढ़े–लिखे न होने के कारण माता–पिता को लगा कि उसे जकड़कर रखना ही एकमात्र उपाय है, ताकि वह दूसरों को तंग न करे।
चाइल्ड हेल्पलाइन की सूचना पर बचाव
यह मामला तब उजागर हुआ जब चाइल्ड हेल्पलाइन 1098 पर एक सूचना मिली और बाल संरक्षण अधिकारियों ने तत्काल हस्तक्षेप करते हुए बच्चे को मुक्त कराया। अधिकारियों के अनुसार, माता–पिता का उद्देश्य भले ही अनुशासन सिखाना रहा हो, पर यह तरीका कानूनी और मानवीय दोनों दृष्टि से गलत है। घटना ने इस बात पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं कि बच्चों के व्यवहार संबंधी समस्याओं को लेकर समाज में आज भी पर्याप्त जागरूकता क्यों नहीं है। विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे मामलों में काउंसलिंग, मार्गदर्शन और संस्थागत सहयोग की आवश्यकता है, ताकि बच्चों का बचपन सुरक्षित रह सके और माता–पिता को भी सही दिशा मिल सके।