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एबी न्यूज़ नेटवर्क।
सातारा में आयोजित 99वें अखिल भारतीय मराठी साहित्य सम्मेलन के उद्घाटन अवसर पर मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस (Fadnavis) ने स्पष्ट कहा कि महाराष्ट्र में केवल मराठी ही अनिवार्य भाषा रहेगी। उन्होंने बताया कि राज्य की भाषा नीति के तहत मराठी के अलावा किसी भी अन्य भाषा को अनिवार्य नहीं किया जाएगा। फडणवीस ने यह भी कहा कि तीन-भाषा फार्मूले के अंतर्गत किन अतिरिक्त भाषाओं को शामिल किया जाना चाहिए, इस पर अध्ययन जारी है। यह बयान तब आया जब मराठी महामंडल के अध्यक्ष प्रो. मिलिंद जोशी ने अन्य भाषाओं के महिमामंडन पर आपत्ति जताते हुए मराठी के सम्मान पर जोर दिया। सम्मेलन का उद्घाटन जानी-मानी लेखिका मृदुला गर्ग ने किया।
‘हर भाषा का सम्मान करें, पर मातृभाषा सर्वोपरि’
फडणवीस ने मराठी की महत्ता पर जोर देते हुए कहा कि हमें विदेशी भाषाओं जैसे अंग्रेजी, फ्रेंच और स्पैनिश के लिए लाल कालीन बिछाने की बजाय भारतीय भाषाओं को भी समान सम्मान देना चाहिए। उन्होंने दो टूक कहा कि मातृभाषा को सर्वोच्च दर्जा मिलना चाहिए, लेकिन सभी भाषाओं का आदर उतना ही आवश्यक है। मुख्यमंत्री ने बताया कि डॉ. नरेंद्र जाधव की अध्यक्षता में बनी एक समिति यह तय करेगी कि किस कक्षा से मराठी को अनिवार्य किया जाए और समिति का काम अंतिम चरण में है। उन्होंने यह भी याद दिलाया कि मराठी को शास्त्रीय भाषा का दर्जा भाजपा सरकार से पहले ही मिल चुका था, और अब इसे पूरे देश में प्रोत्साहित करने के प्रयास किए जाएंगे।
‘साहित्य में राजनीति नहीं, रचनात्मक आलोचना का स्वागत’
मुख्यमंत्री ने साहित्य और राजनीति के संबंधों पर भी अपने विचार रखे। उन्होंने कहा कि जब तक वे मुख्यमंत्री हैं, साहित्यिक आयोजनों में राजनीतिक दखलंदाजी नहीं होगी। उनका मानना है कि साहित्य सिर्फ मनोरंजन नहीं, बल्कि समाज में जागरूकता फैलाने का सशक्त माध्यम है। रचनात्मक आलोचना को वे समाज और शासन, दोनों के लिए लाभदायक मानते हैं। कार्यक्रम के दौरान उन्होंने मंच पर फोन रिसीव करने के लिए साहित्यकारों से क्षमा भी मांगी और कहा कि यह काम नगर पालिका चुनावों से जुड़े जरूरी मामलों के कारण करना पड़ा। सम्मेलन में अध्यक्ष विश्वास पाटिल, स्वागत समिति प्रमुख छत्रपति शिवेंद्र राजे भोसले, पूर्व अध्यक्ष तारा भावलकर और ग्रामीण विकास मंत्री जयकुमार गोरे सहित अनेक गणमान्य उपस्थित रहे। फडणवीस ने विश्वास जताया कि मराठी अस्मिता आने वाली पीढ़ियों तक यूं ही जीवंत रहेगी।