दावोस में AI पर भारत की ताकत, IMF को प्रौद्योगिकी मंत्री से मिला सधा हुआ जवाब

    21-Jan-2026
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- IMF के ‘सेकंड-टियर’ बयान से उठा विवाद

Technology MinisterImage Source:(Internet) 
एबी न्यूज़ नेटवर्क।
वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम (WEF) दावोस 2026 में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के वैश्विक प्रभाव पर हुई चर्चा के दौरान भारत की AI क्षमता को लेकर बड़ा विवाद सामने आया। इंटरनेशनल मॉनेट्री फंड (IMF) की प्रमुख क्रिस्टालिना जॉर्जिएवा ने भारत को ‘सेकंड-टियर AI पावर’ करार दिया। उन्होंने कहा कि अमेरिका, डेनमार्क और सिंगापुर जैसे देश AI के टॉप ग्रुप में हैं, जबकि भारत को दूसरे स्तर पर रखा जा सकता है। हालांकि उन्होंने यह भी माना कि भारत ने IT सेक्टर में लंबे समय से निवेश किया है, लेकिन AI के मामले में वह अभी अग्रणी देशों की कतार में नहीं है। इस बयान के बाद पैनल डिस्कशन का माहौल गर्म हो गया और भारत की स्थिति को लेकर बहस तेज हो गई।
 
अश्विनी वैष्णव का करारा पलटवार
IMF चीफ के बयान पर केंद्रीय इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री अश्विनी वैष्णव ने तुरंत और स्पष्ट जवाब दिया। उन्होंने कहा कि IMF का क्राइटेरिया उन्हें पता नहीं, लेकिन स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी की रिपोर्ट के अनुसार भारत AI पेनेट्रेशन, AI प्रिपेयर्डनेस और AI टैलेंट में दुनिया में तीसरे स्थान पर है, जबकि AI टैलेंट में भारत दूसरे नंबर पर है। वैष्णव ने साफ शब्दों में कहा कि भारत को सेकंड-टियर कहना गलत है और देश स्पष्ट रूप से फर्स्ट ग्रुप में आता है। उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि AI में रिटर्न ऑन इन्वेस्टमेंट सिर्फ बहुत बड़े मॉडल बनाने से नहीं आता, बल्कि 20 से 50 बिलियन पैरामीटर वाले मॉडल से ही 95 प्रतिशत जरूरतें पूरी हो जाती हैं, जिन्हें भारत पहले से विकसित कर विभिन्न सेक्टरों में सफलतापूर्वक लागू कर रहा है।
 
AI की पांचों लेयर में भारत की मजबूत मौजूदगी
अश्विनी वैष्णव ने बताया कि AI आर्किटेक्चर की पांचों लेयर एप्लिकेशन, मॉडल, चिप, इंफ्रास्ट्रक्चर और एनर्जी में भारत तेजी से प्रगति कर रहा है। एप्लीकेशन लेयर में भारत दुनिया का सबसे बड़ा सर्विस प्रोवाइडर बनने की क्षमता रखता है, जहां एंटरप्राइज की जरूरतों को समझकर AI आधारित समाधान दिए जाएंगे। भारत का फोकस केवल स्केल पर नहीं, बल्कि AI को बड़े पैमाने पर डिफ्यूज करने पर है। सेमीकंडक्टर इकोसिस्टम के निर्माण, गूगल जैसे वैश्विक खिलाड़ियों के डेटा सेंटर निवेश और भारतीय स्टार्टअप्स के साथ साझेदारी ने भारत को AI में भरोसेमंद वैश्विक पार्टनर बना दिया है। 5वीं औद्योगिक क्रांति के लक्ष्य के साथ भारत कम लागत वाले, अधिक प्रभावी AI समाधानों पर आगे बढ़ रहा है।