नागपुर को बड़ी सौगात! राफेल लड़ाकू विमानों की असेंबली का केंद्र बनेगा MIHAN

    15-Jan-2026
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Rafale fighter jets
 Image Source:(Internet)
एबी न्यूज नेटवर्क।
भारत और फ्रांस के बीच बहुप्रतीक्षित राफेल (Rafale) लड़ाकू विमान सौदे को अंतिम रूप दिए जाने के साथ ही नागपुर के लिए एक बड़ी और ऐतिहासिक उपलब्धि सामने आई है। इस समझौते के तहत कुल 114 राफेल फाइटर जेट भारतीय वायुसेना को मिलेंगे, जिनमें से 96 विमानों की असेंबली महाराष्ट्र के नागपुर स्थित मिहान (MIHAN) में बने डसॉल्ट रिलायंस एयरोस्पेस लिमिटेड (DRAL) संयंत्र में की जाएगी। यह परियोजना न केवल नागपुर बल्कि पूरे देश के रक्षा और एयरोस्पेस सेक्टर के लिए एक बड़ा मील का पत्थर मानी जा रही है।
 
114 राफेल जेट्स का सौदा, 96 का निर्माण भारत में
समझौते के अनुसार, फ्रांस की प्रमुख एयरोस्पेस कंपनी डसॉल्ट एविएशन भारतीय वायुसेना को कुल 114 राफेल विमान आपूर्ति करेगी। इनमें से 18 विमान पूरी तरह तैयार (फ्लायअवे कंडीशन) स्थिति में फ्रांस से सीधे भारत भेजे जाएंगे, जबकि शेष 96 विमानों का निर्माण भारत में किया जाएगा। भारत में बनने वाले राफेल विमानों में लगभग 60 प्रतिशत तक स्वदेशी सामग्री के इस्तेमाल की संभावना जताई जा रही है, जो ‘मेक इन इंडिया’ और ‘आत्मनिर्भर भारत’ अभियान को मजबूती देगा। इस महत्वाकांक्षी रक्षा सौदे की अनुमानित लागत करीब 3.25 लाख करोड़ रुपये बताई जा रही है।
 
2026 में करार की उम्मीद, 2030 से डिलीवरी संभावित
सूत्रों के अनुसार, यह ऐतिहासिक समझौता फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों की अगले महीने प्रस्तावित भारत यात्रा के दौरान साइन किया जा सकता है। यदि सौदा 2026 की शुरुआत में अंतिम रूप ले लेता है, तो पहले 18 फ्लायअवे राफेल विमानों की डिलीवरी 2030 से शुरू होने की संभावना है। गौरतलब है कि भारत ने वर्ष 2015 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की फ्रांस यात्रा के बाद 36 राफेल जेट्स खरीदे थे। इसके अलावा, पिछले साल भारतीय नौसेना के लिए 26 राफेल मरीन विमानों का भी ऑर्डर दिया गया था।
 
नागपुर बनेगा फ्रांस के बाहर डसॉल्ट का सबसे बड़ा हब
मिहान, नागपुर स्थित DRAL इकाई के पूर्ण असेंबली केंद्र बनने के बाद यह संयंत्र फ्रांस के बाहर डसॉल्ट एविएशन का सबसे बड़ा मैन्युफैक्चरिंग हब बन जाएगा। वर्तमान में यह यूनिट एक जॉइंट वेंचर के रूप में कार्यरत है, जिसमें डसॉल्ट एविएशन की 51 प्रतिशत हिस्सेदारी है, जबकि अनिल अंबानी समूह की कंपनी के पास 49 प्रतिशत हिस्सेदारी है। सूत्रों का यह भी संकेत है कि अनिल अंबानी समूह अपनी हिस्सेदारी किसी अन्य प्रमोटर को बेचकर इस परियोजना से बाहर निकल सकता है। इस परियोजना से नागपुर में बड़े पैमाने पर रोजगार, तकनीकी विकास और वैश्विक पहचान मिलने की उम्मीद की जा रही है, जिससे शहर देश के रक्षा मानचित्र पर और मजबूत स्थिति में आ जाएगा।