- उत्सवों के संग एकता और नई उम्मीद का संदेश
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एबी न्यूज़ नेटवर्क।
भारत की मिट्टी, मौसम और मेहनत से जुड़े फसल पर्वों के अवसर पर कांग्रेस नेता और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी (Rahul Gandhi) ने देशवासियों को हार्दिक शुभकामनाएं दीं। बुधवार को उन्होंने मकर संक्रांति, पोंगल, सुग्गी हब्बा, माघी, भोगाली बिहू, खिचड़ी, पौष पर्व, उत्तरायण और मकरविलक्कु जैसे विविध नामों से मनाए जाने वाले पर्वों का उल्लेख करते हुए शुभेच्छा संदेश साझा किया। सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर राहुल गांधी ने लिखा कि ये सभी पर्व नई शुरुआत, आशा और सकारात्मकता का प्रतीक हैं। खेतों में लहलहाती फसल और घरों में उमंग का माहौल इन त्योहारों को खास बनाता है। उन्होंने कामना की कि ये उत्सव सभी के जीवन में सुख, शांति, आनंद और समृद्धि लेकर आएं।
फसल पर्व: आशा, खुशी और समृद्धि की कामना
राहुल गांधी ने अपने संदेश में कहा कि भारत के फसल पर्व केवल धार्मिक या सांस्कृतिक आयोजन नहीं हैं, बल्कि वे किसानों की मेहनत, प्रकृति के प्रति सम्मान और सामूहिक जीवन मूल्यों को दर्शाते हैं। उन्होंने उम्मीद जताई कि ये त्योहार लोगों के जीवन में नई ऊर्जा भरें और भविष्य के लिए आशावाद को मजबूत करें। मकर संक्रांति से लेकर पोंगल और बिहू तक, हर पर्व अलग क्षेत्र की पहचान होने के बावजूद एक समान भावना खुशी बांटने और कृतज्ञता व्यक्त करने को प्रकट करता है। राहुल गांधी के अनुसार, ये पर्व समाज में भाईचारे और आपसी सद्भाव को बढ़ाते हैं तथा कठिन परिश्रम के फल का उत्सव मनाने का अवसर देते हैं।
फसल उत्सवों की विविधता में सांस्कृतिक शक्ति
इसी अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी मकर संक्रांति, माघ बिहू और पोंगल पर देशवासियों को शुभकामनाएं दीं और इन्हें आशा व सकारात्मकता का प्रतीक बताया। उन्होंने किसानों के योगदान को रेखांकित करते हुए कहा कि ये पर्व अन्नदाताओं के प्रति आभार व्यक्त करने का अवसर हैं। माघ बिहू को असमिया संस्कृति का प्रतिबिंब बताते हुए उन्होंने इसे आनंद, आत्मीयता और भाईचारे का पर्व कहा। देश के अलग-अलग हिस्सों में मनाए जाने वाले लोहरी, उत्तरायण, संक्रांति और पोंगल जैसे उत्सव भारत की सांस्कृतिक विविधता और एकता दोनों को एक साथ उजागर करते हैं।