बीएमसी चुनाव 2026: ‘PADU’ मशीन को लेकर उठा सियासी सवाल

    14-Jan-2026
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- चुनावी प्रक्रिया में नया नाम, बढ़ी हलचल

BMC Elections 2026Image Source:(Internet) 
मुंबई।
मुंबई महानगरपालिका चुनाव (Elections) 2026 से ठीक पहले चुनावी प्रक्रिया में एक नए शब्द ‘PADU’ की एंट्री ने राजनीतिक हलकों में हलचल मचा दी है। मकर संक्रांति की तरह ही यह खबर भी अचानक चर्चा के केंद्र में आ गई, जब चुनाव आयोग ने Printing Auxiliary Display Unit यानी PADU मशीन के इस्तेमाल की जानकारी दी। बताया गया कि यदि ईवीएम में तकनीकी खराबी आती है, तो वैकल्पिक व्यवस्था के रूप में पाडू मशीन का उपयोग किया जाएगा। हालांकि, इस नई मशीन को लेकर पहले से कोई औपचारिक जानकारी सार्वजनिक न होने के कारण विपक्ष ने सवाल खड़े किए हैं। महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (मनसे) प्रमुख राज ठाकरे ने इसे चुनावी पारदर्शिता से जोड़ते हुए आयोग की मंशा पर सवाल उठाए, जिससे यह मुद्दा सियासी बहस का विषय बन गया है।
 
क्या है पाडू मशीन और कैसे करती है काम?
पाडू मशीन का पूरा नाम Printing Auxiliary Display Unit है। मुंबई महानगरपालिका चुनावों में भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड (BEL) द्वारा निर्मित M3A ईवीएम का उपयोग किया जा रहा है। मतगणना के दौरान जब बैलेट यूनिट को कंट्रोल यूनिट से जोड़ा जाता है और उस समय यदि तकनीकी समस्या उत्पन्न होती है, तब पाडू मशीन का सहारा लिया जाता है। यह मशीन ईवीएम से जुड़े डेटा को प्रिंट और डिस्प्ले करने में सहायक होती है, जिससे मतगणना प्रक्रिया बाधित न हो। राज्य निर्वाचन आयोग के निर्देशानुसार बीएमसी को कुल 140 पाडू मशीनें उपलब्ध कराई गई हैं। बीएमसी आयुक्त एवं प्रशासक भूषण गगराणी ने स्पष्ट किया है कि पाडू का इस्तेमाल केवल आपातकालीन परिस्थितियों में ही किया जाएगा, न कि नियमित प्रक्रिया के रूप में।
 
राज ठाकरे के तीखे सवाल, आयोग पर निशाना
मनसे प्रमुख राज ठाकरे ने चुनाव आयोग से कई सवाल पूछे हैं। उन्होंने कहा कि जब कल शाम 5 बजे प्रचार समाप्त हो गया था, तो आज प्रचार या बैठकों की अनुमति कैसे दी गई? पहले की परंपराओं को इस बार क्यों तोड़ा गया? मतदान से एक दिन पहले सभाओं की अनुमति का नोटिफिकेशन आज ही क्यों जारी हुआ? सबसे अहम सवाल यह कि ‘पाडू’ जैसी नई मशीन को ईवीएम से जोड़ने की जानकारी राजनीतिक दलों को पहले क्यों नहीं दी गई? राज ठाकरे ने यहां तक पूछा कि क्या चुनाव आयोग सरकार का उपकरण बनकर काम कर रहा है? इन सवालों के बीच पाडू मशीन अब तकनीकी नहीं, बल्कि राजनीतिक बहस का केंद्र बन चुकी है।