- आधुनिक ट्रेन, लेकिन ज़िम्मेदारी भी उतनी ही जरूरी
Image Source:(Internet)
एबी न्यूज़ नेटवर्क।
भारतीय रेलवे की बहुप्रतीक्षित वंदे भारत स्लीपर (Vande Bharat Sleeper) एक्सप्रेस भले ही रफ्तार, आराम और तकनीक के लिहाज़ से एक नया अध्याय लिखने जा रही हो, लेकिन इसके लॉन्च से पहले ही एक अलग मुद्दा चर्चा में आ गया है यात्रियों का व्यवहार। रेलवे के मुख्य परियोजना प्रबंधक अनंत रूपनगुड़ी ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर यात्रियों को सीधा संदेश देते हुए कहा कि आधुनिक ट्रेनों में यात्रा करने से पहले बुनियादी शौचालय शिष्टाचार समझना जरूरी है। उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि कई यात्री न तो फ्लश करते हैं और न ही यह जांचते हैं कि सिस्टम ठीक से काम कर रहा है। उनका यह पोस्ट वायरल हो गया और हजारों लोगों ने इस पर प्रतिक्रिया दी, जिससे यात्री स्वच्छता को लेकर व्यापक बहस छिड़ गई।
सुविधाओं से पहले व्यवहार पर सवाल
वंदे भारत स्लीपर के औपचारिक शुभारंभ से पहले ही चर्चा इसकी गति या आधुनिक सुविधाओं से ज्यादा यात्रियों की आदतों पर केंद्रित हो गई है। कई सोशल मीडिया यूजर्स ने दावा किया कि 2 एसी और 3एसी जैसे प्रीमियम कोचों में भी कई बार फ्लश काम नहीं करता, पानी या टिश्यू की कमी रहती है। इस पर प्रतिक्रिया देते हुए अनंत रूपनगुड़ी ने कहा कि प्रीमियम सेवाओं में ऐसी समस्याएं बहुत कम देखने को मिलती हैं। उन्होंने वायरल हो रहे कुछ वीडियो को भी भ्रामक या पुराने बताते हुए खारिज किया, जिनमें कथित तौर पर रेलवे कर्मचारी पटरियों पर कचरा फेंकते नजर आते हैं। रेलवे ने स्पष्ट किया कि स्वच्छता नियमों का सख्ती से पालन कराया जा रहा है और उल्लंघन करने वाले विक्रेताओं पर भारी जुर्माना लगाया जा रहा है।
वंदे भारत स्लीपर: नई सुविधा, साझा जिम्मेदारी
वंदे भारत स्लीपर एक्सप्रेस को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 17 जनवरी को गुवाहाटी–हावड़ा रूट पर हरी झंडी दिखाएंगे। यह ट्रेन केवल कन्फर्म टिकट पर चलेगी, इसमें न तो आरएसी होगी और न ही वेटिंग लिस्ट। किराया राजधानी ट्रेनों से थोड़ा अधिक हो सकता है, जबकि यात्रा समय लगभग तीन घंटे तक कम होने की उम्मीद है। रेलवे अधिकारियों का कहना है कि जैसे-जैसे भारतीय रेलवे आधुनिक हो रहा है, वैसे-वैसे यात्रियों को भी स्वच्छता, अनुशासन और सार्वजनिक संपत्ति के प्रति जिम्मेदारी दिखानी होगी। वंदे भारत स्लीपर को लेकर दिया गया यह कड़ा संदेश साफ करता है कि आधुनिक सुविधाएं तभी सफल होंगी, जब यात्री भी उतने ही जागरूक बनें।